बिहार एमएलसी चुनाव: एनडीए और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला तय
बिहार की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी पारा चढ़ने लगा है। राज्य में विधान परिषद की आठ शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नक्शेकदम पर चलते हुए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही एनडीए गठबंधन ने सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशियों की तस्वीर साफ कर दी है। इन चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि इस बार का मुकाबला केवल पारंपरिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि नए राजनीतिक समीकरण भी उभरकर सामने आ रहे हैं।
चुनाव आयोग के तय किए गए आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक, इन सभी आठ सीटों पर प्रतिनिधियों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। इसके मद्देनजर चुनाव प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और विभिन्न दलों के दिग्गज नेता अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये चुनाव आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की जमीनी राजनीतिक नब्ज को टटोलने का एक बड़ा पैमाना साबित होंगे। सभी दल अपनी पूरी क्षमता के साथ अपने पारंपरिक गढ़ों को बचाने और नए क्षेत्रों में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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बीजेपी और जेडीयू ने चार-चार सीटों पर उतारे अपने दिग्गज चेहरे
एनडीए खेमे की बात करें तो सीट शेयरिंग के तहत जेडीयू और बीजेपी ने चार-चार सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। बीजेपी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची में कई जाने-पहचाने नाम शामिल हैं जो अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखते हैं। पार्टी ने अनुभवी और जमीनी नेताओं पर भरोसा जताया है ताकि विधान परिषद में पार्टी की स्थिति को और अधिक मजबूत किया जा सके। इससे पहले जेडीयू ने भी अपनी चार सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया था, जिसमें कई मौजूदा एमएलसी शामिल हैं जो एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
इन आठ सीटों के चुनावी गणित पर अगर गौर किया जाए तो चार सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं और शेष चार सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के तहत आती हैं। नवल किशोर यादव, एनके यादव और सर्वेश कुमार जैसे प्रमुख नेता मौजूदा एमएलसी के रूप में एक बार फिर मैदान में ताल ठोक रहे हैं। एनडीए नेतृत्व को पूरी उम्मीद है कि उनके ये अनुभवी उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों और अपने प्रभाव के दम पर एक बार फिर से जीत हासिल करने में सफल रहेंगे। हालांकि, विपक्ष की ओर से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए मुकाबला आसान नहीं रहने वाला है।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच महामुकाबला
इन तमाम सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हो रही है, जहां का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल बनता जा रहा है। इस सीट से जेडीयू की ओर से पार्टी के कद्दावर नेता और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। अपनी आक्रामक शैली और बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले नीरज कुमार के सामने इस बार प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' के टिकट पर उतरे डॉ. अनुज सिंह कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इस सीट पर मुकाबला इतना दिलचस्प हो गया है कि राजनीतिक पंडितों की निगाहें पूरी तरह से इसी पर टिकी हुई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह को स्थानीय स्तर पर कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का समर्थन भी मिल रहा है, जिससे यह लड़ाई और भी ज्यादा कांटे की हो गई है। प्रशांत किशोर की पार्टी ने इन सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद रोमांचक बना दिया है। हालांकि जन सुराज ने अपने कुछ उम्मीदवारों में बाद में बदलाव भी किया है, जिससे उनकी रणनीति में हो रहे बदलाव साफ झलकता है। देखना यह होगा कि आम मतदाता इस बार पुराने और अनुभवी नेताओं के अनुभव पर भरोसा जताते हैं या फिर नए राजनीतिक विकल्पों को चुनते हैं।
महागठबंधन और अन्य दलों की रणनीति, जानिए पूरा चुनावी शेड्यूल
केवल एनडीए और जन सुराज ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस समेत महागठबंधन के अन्य घटक दल भी इन चुनावों में पूरी ताकत से उतर चुके हैं। राजद ने आठ में से छह सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि कुछ सीटों पर आपसी खींचतान और सीटों के तालमेल को लेकर भी स्थिति थोड़ी उलझन भरी रही है। कांग्रेस ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सीटिंग एमएलसी मदन मोहन झा को दोबारा मैदान में उतारा है। वहीं, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सीपीआई के प्रोफेसर संजय कुमार सिंह एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन दोनों सीटों पर राजद ने अपने उम्मीदवार न उतारकर महागठबंधन के भीतर आपसी समन्वय का संदेश दिया है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर को पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के जरिए होगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी और उसी दिन परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। दीपावली से ठीक पहले आने वाले ये चुनावी नतीजे बिहार की सियासत में एक नया संदेश देने का काम करेंगे।
"बिहार विधान परिषद के ये चुनाव आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और मतदाता बहुत ही समझदारी के साथ अपना प्रतिनिधि चुनेंगे।" — राजनीतिक विश्लेषक
अंततः यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या एनडीए अपने पुराने गढ़ों को बचाने में पूरी तरह कामयाब हो पाता है या फिर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और महागठबंधन के अन्य दल कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होते हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता राज्य के सबसे प्रबुद्ध वर्ग माने जाते हैं, इसलिए उनका झुकाव हमेशा से चौंकाने वाला रहा है। 27 अक्टूबर को आने वाले परिणाम ही बताएंगे कि बिहार के इन प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और स्नातकों ने किस पर अपना भरोसा जताया है।


