बिहार में शिक्षकों के तबादलों पर क्यों लगी है रोक
बिहार के लाखों शिक्षकों के लिए तबादले की प्रक्रिया एक बार फिर तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों में फंसती नजर आ रही है। राज्य में होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनावों के मद्देनजर लागू की गई आदर्श आचार संहिता का सीधा असर शिक्षकों के ट्रांसफर पर पड़ा है। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई विभिन्न स्थानांतरण सूचियों पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है। इस स्थिति ने उन शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है जो लंबे समय से अपनी पदस्थापना बदलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरप्लस शिक्षकों के समायोजन, म्यूचुअल ट्रांसफर (पारस्परिक स्थानांतरण) और अंतरजिला तबादले से जुड़ी सूचियां फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई हैं। चूंकि विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक ही मतदाता होते हैं, इसलिए निर्वाचन आयोग और शिक्षा विभाग आचार संहिता के नियमों का कड़ाई से पालन कर रहे हैं। यही वजह है कि विभाग ने किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग से आधिकारिक मार्गदर्शन मांगा है।
संबंधित खबरें
ई-शिक्षाकोष पोर्टल और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
बिहार सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल की शुरुआत की थी, जिसके जरिए शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। पांच साल या उससे अधिक समय से एक ही स्कूल में जमे शिक्षकों के सामान्य स्थानांतरण के लिए भी इसी पोर्टल को माध्यम बनाया गया है। नियमों के तहत शिक्षकों को पोर्टल के जरिए अपने दस्तावेज और विकल्प अपलोड करने थे, लेकिन आचार संहिता की दीवार ने इस डिजिटल प्रक्रिया की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली गई थी और औपबंधिक सूचियां पहले ही जारी कर दी गई थीं। इन सूचियों पर आई आपत्तियों का निस्तारण भी लगभग पूरा हो चुका था, और केवल अंतिम सूची का प्रकाशन बाकी था। लेकिन ठीक उसी समय चुनाव आचार संहिता लागू हो गई, जिसके बाद नियमों के तहत बिना आयोग की अनुमति के नई सूचियां जारी करना संभव नहीं रहा।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश का इंतजार
अब पूरी प्रशासनिक मशीनरी और शिक्षा विभाग की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों और प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या आचार संहिता के दौरान ट्रांसफर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है या फिर चुनाव संपन्न होने तक इंतजार करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही आयोग हरी झंडी देगा, सूचियों को जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
विभिन्न जिलों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, शिक्षक संघ भी इस मामले में लगातार नजर बनाए हुए हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि स्थानांतरण सूची में देरी होने से उन्हें पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, विभाग की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि आयोग का निर्देश मिलते ही दो से चार दिनों के भीतर सूचियों का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
राजनीतिक सरगर्मी और चुनाव का माहौल
बिहार में इन दिनों विधान परिषद की सीटों पर हो रहे चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा भी चढ़ा हुआ है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के इन चुनावों में शिक्षित मतदाताओं की बड़ी भूमिका होती है, जिसके चलते सरकार और राजनीतिक दल दोनों ही शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। हाल के समय में परीक्षा सुधार, पेपर लीक रोकने के उपायों और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े कई बड़े ऐलान भी किए गए हैं, ताकि चुनावी समीकरणों को साधा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के इस माहौल में प्रशासन किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचना चाहता है जिससे आचार संहिता के उल्लंघन का सवाल उठे। यही कारण है कि शिक्षकों के स्थानांतरण जैसे प्रशासनिक मामलों में भी अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है। जब तक मतदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नीतिगत और बड़े प्रशासनिक फैसलों पर रोक जारी रहने की संभावना है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया और शिक्षकों के लिए संदेश
बिहार के शिक्षकों के लिए यह दौर थोड़ा धैर्य रखने का है। जिन शिक्षकों ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से अपने आवेदन दिए हैं और जिनकी आपत्तियों का निराकरण हो चुका है, उन्हें अब केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। शिक्षा विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग से स्पष्ट अनुमति मिलते ही सबसे पहले रुकी हुई अंतिम सूचियों को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि नए सत्र या निर्धारित समय पर शिक्षक अपने नए कार्यभार को संभाल सकें।
"शिक्षकों के तबादले से जुड़ी फाइल पर आचार संहिता के नियमों के तहत विचार किया जा रहा है। हमने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे हैं। आयोग से हरी झंडी मिलते ही अंतिम सूचियों को प्रकाशित कर दिया जाएगा, जिससे शिक्षकों को राहत मिल सकेगी।" — जिला शिक्षा अधिकारी






