नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में सियासी पारा अचानक बहुत चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। यह पूरा विवाद छात्र संगठन आइसा की नेता के बयान से शुरू हुआ। छात्र नेता ने अपने भाषण में पड़ोसी देश बांग्लादेश के आंदोलन का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि वहां के छात्रों ने सत्ता बदल दी। भाजपा ने इस बयान को बेहद खतरनाक और देशविरोधी बताया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि इसके पीछे राहुल गांधी की सोच काम कर रही है। दूसरी तरफ छात्र संगठन इस आरोप को सिरे से नकार रहे हैं। राजधानी की सड़कों पर सुरक्षा एजेंसियां अब पूरी तरह अलर्ट पर हैं।
विवाद की शुरुआत दिल्ली के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई। आइसा से जुड़ी नेता नेहा बोरा ने युवाओं की सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने बेरोजगारी और पेपर लीक का मुद्दा उठाया था। अपने भाषण में उन्होंने बांग्लादेश के छात्र प्रदर्शनों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि छात्र शक्ति किसी भी अहंकारी सरकार को झुका सकती है। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कड़ा एतराज जताया। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ भाषण नहीं बल्कि बड़ी साजिश है। वे देश की चुनी हुई सरकार को सड़क के रास्ते हटाना चाहते हैं।
क्या है बांग्लादेश वाले बयान का पूरा विवाद?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने मीडिया के सामने आकर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं जीत पा रहा है। इसलिए अब वह छात्रों को भड़का कर दंगे कराना चाहता है। भाजपा नेता ने कहा कि यह भाषा सीधे तौर पर देश में अराजकता फैलाने वाली है। पार्टी का आरोप है कि राहुल गांधी लगातार विदेशी धरती पर ऐसे बयान देते रहे हैं। अब वही सोच देश के विश्वविद्यालयों के जरिए सड़कों पर उतारी जा रही है। भाजपा ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस इस पूरे भाषण की वीडियो फुटेज की कानूनी जांच कर रही है।
दूसरी ओर छात्र संगठनों ने भाजपा के इन आरोपों पर पलटवार किया है। आइसा के छात्र नेताओं का कहना है कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने किसी हिंसा या दंगे का समर्थन नहीं किया था। छात्रों का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं। देश में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और भर्तियां अटकी पड़ी हैं। जब युवा रोजगार मांगते हैं तो उन पर देशद्रोह का ठप्पा लगाया जाता है। विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसे बखेड़े खड़े करती है। छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे।
दिल्ली की सड़कों पर कड़ा पहरा और पुलिस की तैयारी
इस बयानबाजी के बाद दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में चौकसी बढ़ा दी है। जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जगह-जगह लोहे के मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। बिना जांच के किसी भी समूह को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी संवेदनशील चौराहों पर तैनात रखा गया है। छात्रों ने संसद की तरफ मार्च निकालने की कोशिश की थी। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में भेजा। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति किसी भी मार्च की इजाजत नहीं होगी। कानून और व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
द फ्रीलान्स की टीम ने मौके पर मौजूद कई आम छात्रों से बात की। प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल के मोहरे नहीं हैं। वे केवल अपनी पढ़ाई और नौकरी के सुरक्षित भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं। वहीं पास के दुकानदारों का कहना है कि आए दिन के प्रदर्शन से उनका कारोबार ठप हो जाता है। पुलिस की नाकेबंदी के कारण आम राहगीरों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। कनॉट प्लेस और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास ट्रैफिक रेंगता नजर आया। स्थानीय लोगों ने कहा कि विरोध का हक सबको है पर रास्ते बंद नहीं होने चाहिए।
वोटर लिस्ट और आगामी चुनावी लड़ाई की जमीन
यह पूरा विवाद ऐसे समय में उठा है जब चुनाव आयोग भी सक्रिय है। चुनाव आयोग ने कई राज्यों में वोटर लिस्ट के विशेष सुधार के आदेश दिए हैं। चुनावी साल में युवा मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। भाजपा का मानना है कि विपक्षी दल युवाओं को भड़का कर चुनावी माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार युवाओं के असली सवालों से भाग रही है। दोनों ही खेमे अब इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। तरह-तरह के वीडियो और दावे पोस्ट किए जा रहे हैं।
संसद से लेकर सड़क तक आगे क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तकरार अभी और तेज होने वाली है। आने वाले दिनों में संसद सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा हो सकता है। छात्र संगठन आने वाले दिनों में देश भर के परिसरों में अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं। वहीं भाजपा कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं। भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र पर हमला बताकर पेश कर रही है। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा पूरे मामले के सोशल मीडिया कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है। यह साफ है कि आने वाले दिनों में युवाओं के मुद्दे राजनीति के केंद्र में रहेंगे। सरकार और विपक्ष दोनों ही इस आर-पार की लड़ाई में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।





