कैपिटल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. मदन कुमार ने साझा की विजन रिपोर्ट
झारखंड के शैक्षणिक परिदृश्य में एक नया और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कैपिटल विश्वविद्यालय लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. मदन कुमार ने एक खास बातचीत के दौरान अपने भविष्य के प्लान और विजन को विस्तार से साझा किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज के समय में सिर्फ किताबी ज्ञान देना काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता के साथ जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग है।
कोडरमा जैसे तेजी से उभरते शहर में युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को सुगम बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने जमीन पर उतरकर काम शुरू कर दिया है। गझंडी के निकट बेंदी बिलारो क्षेत्र में बनाए गए इस नए और भव्य कैंपस का मुख्य उद्देश्य यही है कि इलाके के बेटे-बेटियों को उनके घर-द्वार के पास ही देश के बेहतरीन शिक्षण मानक उपलब्ध कराए जा सकें। कुलाधिपति का मानना है कि बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता इस बात से तय होती है कि वह अपने आस-पास के समाज को कितना सशक्त बनाता है। एक विश्वविद्यालय कभी भी अपने परिवेश से कटकर तरक्की नहीं कर सकता। इसलिए कैपिटल विश्वविद्यालय का पूरा फोकस इस बात पर है कि यहाँ से निकलने वाला हर छात्र समाज की मुख्यधारा में अपनी एक मजबूत और उपयोगी जगह बना सके।
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स्थानीय युवाओं को पलायन से रोकने की दिशा में ठोस पहल
आमतौर पर यह देखा जाता है कि झारखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र उच्च शिक्षा और बेहतर रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। इस माइग्रेशन की वजह से न सिर्फ परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की कमी भी महसूस होने लगती है। कैपिटल विश्वविद्यालय इस पुरानी परंपरा को बदलने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।
कुलाधिपति डॉ. मदन कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारा संकल्प है कि छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों का रुख न करना पड़े। जब तमाम जरूरी संसाधन, बेहतरीन फैकल्टी और उच्च कोटि की लैब्स उन्हें अपने ही जिले में मिलेंगी, तो वे यहीं रहकर अपने सपनों को नई उड़ान दे सकेंगे। इस दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई आधुनिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं जो वर्तमान कॉर्पोरेट जगत की जरूरतों के बिल्कुल अनुकूल हैं।
स्थानीय स्तर पर क्वालिटी एजुकेशन मिलने से न केवल मध्यम वर्गीय परिवारों के खर्चों में कमी आएगी, बल्कि क्षेत्र की साक्षरता दर और प्रोफेशनल स्किल्स का ग्राफ भी तेजी से ऊपर उठेगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन का यह कदम आने वाले समय में झारखंड के शैक्षिक मानचित्र पर एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
पढ़ाई के साथ स्किल डेवलपमेंट और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर सबसे बड़ा जोर
आज की आधुनिक दुनिया में सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना नौकरी की गारंटी नहीं रह गया है। इस बात को गहराई से समझते हुए कैपिटल विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में स्किल डेवलपमेंट को सबसे ऊपर रखा है। छात्रों को केवल कक्षाओं में थ्योरी पढ़ाने के बजाय उन्हें वास्तविक कार्यस्थल के अनुभवों से रूबरू कराया जा रहा है, जिससे वे इंडस्ट्री-रेडी बन सकें।
विश्वविद्यालय के विजन के बारे में बात करते हुए कुलाधिपति ने बताया कि इंटर्नशिप प्रोग्राम, समर ट्रेनिंग, और बड़े औद्योगिक घरानों के साथ पार्टनरशिप पर लगातार काम चल रहा है। छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही कॉर्पोरेट संस्कृति को समझ सकें और पेशेवर चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें, इसके लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।
"हमारा उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं है, बल्कि युवाओं को ऐसा हुनर देना है जो उन्हें जिंदगी की हर रेस में सबसे आगे रखे। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो इंसान को न केवल नौकरी ढूँढने वाला बनाए, बल्कि दूसरों को नौकरी देने की कूवत भी उसमें पैदा करे।" — डॉ. मदन कुमार, कुलाधिपति, कैपिटल विश्वविद्यालय
उद्यमिता और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने की अनूठी रणनीति
नौकरीपेशा बनने की पारंपरिक मानसिकता से बाहर निकलकर आज के युवाओं को बिजनेसमैन और आंत्रप्रेन्योर बनाने का बीड़ा कैपिटल विश्वविद्यालय ने उठाया है। कुलाधिपति डॉ. मदन कुमार का मानना है कि देश और समाज की स्थानीय समस्याओं को पहचानकर उनका कम लागत में समाधान निकालना ही एक सच्चे आंत्रप्रेन्योर की पहचान है। विश्वविद्यालय परिसर में इसके लिए एक विशेष बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर की भी रूपरेखा तैयार की गई है।
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी छोटे स्तर पर बिजनेस शुरू करके बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। विश्वविद्यालय युवाओं को बिजनेस आइडिया जनरेट करने, उसकी फिजिबिलिटी चेक करने और फंडिंग से लेकर मार्केट तक पहुँचने की पूरी प्रक्रिया में मेंटरशिप प्रदान कर रहा है। इससे छात्रों में जोखिम लेने की क्षमता और लीडरशिप क्वालिटी विकसित हो रही है।
इन तमाम पहलों के जरिए विश्वविद्यालय का यह प्रयास है कि झारखंड की धरती से ऐसे युवा निकलें जो खुद के स्टार्टअप शुरू करें और अपने जैसे सैकड़ों अन्य युवाओं को रोजगार मुहैया करा सकें। शिक्षा, कौशल और उद्यमिता का यह अनूठा त्रिकोण निश्चित रूप से आने वाले कल के भारत की तस्वीर बदलने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा।
निष्कर्ष: भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रही है युवा पीढ़ी
कुल मिलाकर देखा जाए तो कैपिटल विश्वविद्यालय का यह समग्र दृष्टिकोण सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक पूरे समाज को आत्मनिर्भर बनाने का सुविचारित ब्लूप्रिंट है। कुलाधिपति डॉ. मदन कुमार के नेतृत्व में विश्वविद्यालय जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में यह संस्थान पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख एजुकेशनल हब के रूप में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराएगा।




