नई दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों हलचल बहुत तेज है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी का प्रदर्शन हिंसक और तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस ने कई प्रमुख नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद राजधानी की सड़कों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली के कई इलाकों को पुलिस ने छावनी में बदल दिया है।
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक राय रखने वाले ध्रुव राठी का बड़ा बयान सामने आया है। ध्रुव राठी ने हिरासत में लिए गए नेताओं का समर्थन करते हुए कहा है कि सभी भारतीयों को एक साथ आना चाहिए। उनके इस बयान के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां उनके समर्थक इस बात का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभिनेता मुकेश खन्ना ने ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके पर तीखा हमला बोला है। मुकेश खन्ना ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए इन सोशल मीडिया चेहरों की आलोचना की है।
सीजेपी प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कड़ी कार्रवाई
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जिस तरह से सख्ती दिखाई, उस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन ने भी दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यूएन के बयानों और रिपोर्टों के बाद मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता का मुद्दा फिर से गर्मा गया है। देश के भीतर विपक्षी नेता भी इस कार्रवाई के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दिल्ली को किले में तब्दील करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
शशि थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को मिलना चाहिए। नेताओं की इस तरह से हो रही लगातार हिरासत पर उन्होंने सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि इस तरह की पाबंदियां देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ठीक नहीं हैं। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष का साफ कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है। बिना अनुमति के हो रहे प्रदर्शनों से शहर की शांति भंग होने का खतरा रहता है। इसलिए प्रशासन को एहतियात के तौर पर सख्त कदम उठाने पड़े।
विपक्ष की नाराजगी और सेलिब्रिटी बयानों का असर
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ जहां सीजेपी के नेता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं प्रशासन किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार ही कार्रवाई की जा रही है। आम जनता भी इस बात को लेकर बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ लोगों का मानना है कि विरोध जताना नागरिकों का हक है। वहीं कुछ लोगों का यह भी सोचना है कि सार्वजनिक जीवन में अनुशासन और नियमों का पालन सबसे ऊपर होना चाहिए।
जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। दिल्ली की सीमाओं और मुख्य चौराहों पर पुलिस बल तैनात है। आने-जाने वाले वाहनों की कड़ी जांच की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है क्योंकि राजनीतिक दल इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी हर नए अपडेट से आपको अवगत कराती रहेगी।








