अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट
मिडिल ईस्ट से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है, जिसका सीधा असर ग्लोबल कमोडिटी बाजार और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में से एक ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव अब कुछ नरम पड़ता नजर आ रहा है। ईरान की ओर से एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है, जिसके बाद कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार, इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
हाल ही में आए आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत फिसलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है, जो पिछले दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इसके साथ ही, कॉमेक्स पर क्रूड ऑयल में भी 2 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट देखने को मिली। ट्रेडर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक नरमी आ सकती है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों को काफी फायदा होगा।
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क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा मामला और क्यों है यह अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने हाल ही में घोषणा की है कि अगर अमेरिका उनके बंदरगाहों से अपनी नाकाबंदी हटा लेता है, तो ईरान महज सात दिनों के भीतर इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह से दोबारा खोलने के लिए तैयार है। ईरान के इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति और तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से ठीक पहले इस तरह के नरमी के संकेतों ने ट्रेडर्स को बड़ी राहत दी है। इससे पहले तक इस रास्ते पर लगातार तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी रिस्क प्रीमियम जुड़ा हुआ था। अब जैसे ही तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, वैसे ही बाजार में बिकवाली बढ़ गई है और कीमतें धड़ाम हो गईं हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और महंगाई पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
सोना और चांदी की चमक पर भी पड़ा अंतरराष्ट्रीय खबरों का असर
कच्चे तेल के अलावा कीमती धातुओं यानी सोना और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त बयानों के कारण सोने और चांदी पर लगातार दबाव बना हुआ है। हाजिर बाजार में सोना फिसलकर अपने तय दायरे से नीचे आया है, जबकि चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई है। निवेशकों का ध्यान अब फेड रिजर्व की अगली बैठकों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है।
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एवीपी कायनात चैनवाला ने इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए बताया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयानों से बाजार में सतर्कता का माहौल है। मिनियापोलिस फेड के अध्यक्ष काशकारी और अन्य अधिकारियों ने यह संकेत दिए हैं कि महंगाई अभी भी उनके लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, जिससे ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद कीमती धातुओं में कुछ हद तक संभलने के संकेत भी मिले हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम घटने का सीधा मतलब है कि भारत का आयात बिल कम होगा। जब कच्चे तेल के दाम गिरते हैं, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखने या उनमें कटौती करने की गुंजाइश बढ़ जाती है। हालांकि, घरेलू ईंधन की कीमतें पूरी तरह से सरकारी तेल कंपनियों और विनिमय दरों पर निर्भर करती हैं, लेकिन ग्लोबल मार्केट में इस बड़ी गिरावट से देश के आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जग गई है।
"अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह से समाप्त होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी बाधा के खुल जाता है, तो आने वाले हफ्तों में क्रूड ऑयल की कीमतों में और अधिक करेक्शन देखने को मिल सकता है। इसका सकारात्मक असर वैश्विक महंगाई को नियंत्रित करने में होगा।"— कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जब तक इस हफ्ते होने वाली बैठकों के कोई ठोस और आधिकारिक नतीजे सामने नहीं आते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। निवेशकों और आम जनता दोनों की नजरें अब अमेरिका और ईरान के आधिकारिक रुख पर टिकी हुई हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रण में रहीं, तो इसका फायदा देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर को भी मिलेगा, जिससे अंततः आम आदमी की रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं।







