नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। इस हंगामे के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें पीड़ित कॉन्स्टेबल कैमरे पर रोते हुए अपना दर्द और आपबीती सुना रहा है। यह वीडियो प्रशासनिक अमले और राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। भीड़ के बीच घिरे कुछ सुरक्षाकर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे ड्यूटी पर तैनात खाकी वर्दीधारी सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं और उनके साथ किस तरह का बर्ताव किया गया।
प्रदर्शन के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन और एफआईआर
सड़क पर मचे इस भारी बवाल और पुलिसकर्मी के साथ हुई बदसलूकी के बाद दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रदर्शन के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई नामी और दिग्गज नेताओं के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई प्रमुख नेताओं के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने हिंसा फैलाई और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से मारपीट की।
दूसरी ओर, दिल्ली में बिना अनुमति के प्रदर्शन और रैलियों को लेकर राजनीति गरमा गई है। इसी बीच अन्य राजनीतिक और सामाजिक एक्टिविस्ट भी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में अभिजीत दीपके द्वारा बिना अनुमति के जंतर-मंतर जाने की तैयारी के दौरान दिए गए बयान ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सत्ता भले ही सरकार की हो, लेकिन सड़क पर उतरने का हक आम जनता का भी है। इस तरह के बयानों से राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है और पुलिस प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
कानून व्यवस्था और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता टकराव
राजधानी में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने आम जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। एक तरफ राजनीतिक दल अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों का सहारा ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस बल को कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस खींचतान में सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों और ड्यूटी पर तैनात उन जवानों को उठानी पड़ रही है, जिनका राजनीति से कोई लेना-देचना नहीं होता है। कॉन्स्टेबल के रोने वाला वीडियो इस बात का प्रमाण है कि जमीन पर काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों को किस तनावपूर्ण माहौल का सामना करना पड़ता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आधार बनाकर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की तैयारी कर रही है। राजनीतिक दलों के कार्यालयों और प्रदर्शन स्थलों के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की नई हिंसा को समय रहते रोका जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी लड़ाई और तेज होने के पूरे आसार हैं, क्योंकि पुलिस ने साफ कर दिया है कि खाकी पर हाथ उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।










