देर रात अचानक डोलने लगी धरती
रात का सन्नाटा था और लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। तभी अचानक जमीन हिलने लगी। पलंग और पंखे डोलने लगे। यह नजारा था बीती रात दिल्ली और आसपास के इलाकों का। अचानक आए इस भूकम्प ने एक बार फिर लोगों को डरा दिया। लोग अपनी नींद छोड़कर जान बचाने के लिए घरों से बाहर खुली सड़कों की तरफ भागे।
भूकंप के ये झटके सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं थे। नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में धरती हिलने का अहसास हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक झटके काफी तेज थे। कई इमारतों में रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें लगा जैसे कोई भारी चीज तेजी से हिली हो।
उत्तर भारत के कई राज्यों में कांपी धरती
राजधानी दिल्ली के अलावा उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के कई जिलों में धरती हिलने की पुष्टि हुई है। लोग आधी रात को अपने घरों से निकलकर पार्कों और चौराहों पर इकट्ठा हो गए। हर कोई एक-दूसरे से फोन पर खैरियत जानता नजर आया।
आपदा के इन पलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तुरंत बाढ़ आ गई। लोगों ने तुरंत लिखना शुरू कर दिया कि क्या उन्हें भी झटके महसूस हुए हैं। कुछ ही मिनटों में ट्विटर और अन्य जगहों पर भूकंप ट्रेंड करने लगा। लोग एक-दूसरे से सुरक्षित रहने की अपील करने लगे।
कहाँ था भूकंप का केंद्र और कितनी थी तीव्रता?
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार भूकम्प का केंद्र जमीन के नीचे काफी गहराई में था। हालांकि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता और केंद्र की सटीक लोकेशन का आकलन वैज्ञानिक कर रहे हैं। भूकंप विज्ञान केंद्र लगातार इस पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी बड़े नुकसान का आकलन किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के कई हिस्से सिस्मिक जोन में आते हैं। इसलिए यहां भूकंप आना कोई नई बात नहीं है। इसके बावजूद अचानक आए झटकों से आम जनता में अफरा-तफरी मच जाती है। राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
भूकंप आने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का जोर नहीं चलता है। ऐसे में सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा साधन है। जब भी भूकंप के झटके महसूस हों, तो घबराना नहीं चाहिए। तुरंत मजबूत फर्नीचर जैसे कि मेज के नीचे छिप जाना चाहिए। लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें और सीढ़ियों से नीचे उतरें।
खुली जगह पर जाएं और बिजली के खंभों या बड़ी इमारतों से दूर रहें। हर घर में एक इमरजेंसी किट होनी चाहिए जिसमें टॉर्च, जरूरी दवाइयां और पानी हो। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें हमेशा अपील करती हैं कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।




