नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के जाने-माने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर और यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गए हैं। पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग तेजी से उठ रही है। आलोचकों और कुछ संगठनों ने उनके ऊपर देश विरोधी गतिविधियों और गलत सूचनाएं फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस पूरे मामले ने इंटरनेट की दुनिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है।
ताजा घटनाक्रम के अनुसार, विभिन्न मंचों से यह मांग की जा रही है कि ध्रुव राठी का पासपोर्ट तुरंत जब्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि उनके यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली फंडिंग की गहन जांच होनी चाहिए। आरोप है कि विदेश से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अभी तक यूट्यूबर या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक और विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।
यूट्यूबर पर लगे गंभीर आरोप और एनएसए की मांग
इस पूरे विवाद के दौरान कुछ हलकों से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत कार्रवाई करने की भी मांग उठी है। जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया के इस दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जाने वाली सामग्री को लेकर नियम और कड़े होने चाहिए। पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में डिजिटल क्रिएटर्स की भूमिका को लेकर बहस छिड़ी हुई है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ऑनलाइन वीडियो के जरिए समाज में गलत संदेश जा रहा है या फिर यह अभिव्यक्ति की आजादी का मामला है।
दूसरी तरफ, इस राजनीतिक माहौल के बीच अन्य दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां एक धड़ा यूट्यूबर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे विचारों के दमन के रूप में देख रहे हैं। इस गर्माहट भरे माहौल के कारण इंटरनेट पर समर्थन और विरोध दोनों तरह के ट्रेंड्स लगातार बने हुए हैं। आम जनता भी सोशल मीडिया पर बंटी हुई नजर आ रही है और हर कोई अपने हिसाब से इस पूरी बहस का समर्थन या विरोध कर रहा है।
फंडिंग के स्रोतों पर उठ रहे हैं बड़े सवाल
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, इस मामले की जड़ें पिछले कई महीनों की ऑनलाइन बहसों से जुड़ी हैं। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद से ही सरकार और जांच एजेंसियों की नजर ऐसे मामलों पर पैनी हो गई है जहां विदेशी फंडिंग का एंगल सामने आता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में डिजिटल क्रिएटर्स की कमाई और उनके विदेशी संपर्कों की पड़ताल और तेज हो सकती है। प्रशासन इस बात की भी जांच कर सकता है कि डिजिटल विज्ञापनों और क्राउडफंडिंग के जरिए आने वाला पैसा किन नियमों के तहत आ रहा है।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज होती है या फिर यह मामला सिर्फ बयानों तक ही सीमित रहता है। ध्रुव राठी के लाखों फॉलोअर्स हैं और उनके किसी भी मुद्दे पर बोलने से देश भर के युवाओं में खासी चर्चा होती है। यही वजह है कि उनके खिलाफ उठने वाली इस मांग को लेकर राजनीति और मीडिया दोनों में उबाल है। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया प्रशासनिक कदम उठाया जाएगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।
राजनीतिक दलों के बीच छिड़ी तीखी बयानबाजी
इस ताजा विवाद के साथ ही देश के दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। पंजाब और अन्य राज्यों के घटनाक्रमों को जोड़कर नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। कानून व्यवस्था और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स अब सीधे तौर पर मुख्यधारा की राजनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं, जिससे हर बड़े बयान पर तुरंत राजनीतिक प्रतिक्रिया आ रही है।
आम नागरिक के तौर पर इस पूरे विवाद को समझना बेहद जरूरी है क्योंकि यह सोशल मीडिया की आजादी और देश की सुरक्षा के बीच एक महीन रेखा खींचता है। क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बोलने की पूरी छूट होनी चाहिए या फिर सरकार को कड़े नियम बनाने चाहिए, यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले से जुड़े हर एक कानूनी पहलू और प्रशासनिक अपडेट पर लगातार अपनी पैनी नजर रखेगी।




