डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- जल्द खत्म होगा ईरान के साथ युद्ध
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को वॉशिंगटन डीसी में एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संघीय मंच की शुरुआत के मौके पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा मौजूदा सैन्य संघर्ष बहुत जल्द इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा। ट्रंप के अनुसार, आने वाले वर्षों में इतिहासकार इस लड़ाई को उनके प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसलों में से एक के तौर पर याद रखेंगे।
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति बेहद कमजोर होती जा रही है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की छूट नहीं दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि इस युद्ध का अंत बेहद करीब है और इसके बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिलेगी। उनके मुताबिक, तेल के दाम उस स्तर पर आ जाएंगे जो इस सैन्य कार्रवाई से पहले दर्ज किए गए थे।
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होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही और वैश्विक बाजार पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होती नजर आ रही हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से पिछले एक हफ्ते के दौरान रोजाना औसतन करीब 1.32 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही दर्ज की गई है। यह आंकड़ा युद्ध शुरू होने से पहले के सामान्य स्तर का लगभग 77 फीसदी है, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक व्यापार पटरी पर लौटने लगा है।
हालांकि समुद्री मार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोलने को लेकर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत अभी भी जारी है। मध्यस्थ देशों के माध्यम से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुचारू बनाया जा सके। ईरानी पक्षों की तरफ से भी इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह बहाल करने के लिए कुछ प्रस्तावों पर विचार किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ईरानी संसद और सैन्य नेतृत्व की कड़ी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, ईरान के राजनीतिक और सैन्य हलकों से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिकी और इजरायली नीतियों पर करारा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र से अंततः हटना ही होगा, जबकि ईरान और उसके स्थानीय पड़ोसी यहीं डटे रहेंगे। अजीजी का यह बयान दोनों देशों के बीच जारी वैचारिक और रणनीतिक टकराव की गहराई को साफ बयां करता है।
इसके अलावा, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रवक्ताओं ने भी अमेरिकी बयानों पर पलटवार करते हुए कहा है कि इस पूरे टकराव की असल वजह परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान की बढ़ती क्षेत्रीय ताकत है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि दुश्मन देश उनकी संप्रभुता को कमजोर करना चाहते हैं, जिसका डटकर मुकाबला किया जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि एक तरफ जहां अमेरिका सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए समझौते का दबाव बना रहा है, वहीं ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है।
अमेरिकी प्रशासन का आकलन और सर्वोच्च नेतृत्व की स्थिति
व्हाइट हाउस और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नजरें भी तेहरान की अंदरूनी राजनीतिक हलचल पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का यही मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अभी जीवित हैं, हालांकि इस बात की पूरी और पुख्ता पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। वेंस के अनुसार, हालांकि हाल के दिनों में उन्हें कैमरे पर नहीं देखा गया है, फिर भी उपलब्ध संकेत उनके जीवित होने की ओर ही इशारा करते हैं।
"हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। बहुत जल्द यह संघर्ष अपने मुकाम पर पहुंचेगा और इसके परिणाम पूरी दुनिया के सामने होंगे। आने वाला समय इस बात का गवाह बनेगा कि हमारे प्रशासन ने क्षेत्र में स्थिरता के लिए कितने कड़े और सही फैसले लिए।" — डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस उच्च-दांव वाले भू-राजनीतिक खेल में अब बयानों के जरिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने की होड़ मची हुई है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति इस संघर्ष के जल्द खात्मे और आर्थिक सुधार का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरानी नेता अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय दबदबे को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कूटनीतिक चैनलों के जरिए होर्मुज स्ट्रेट और शांति वार्ताओं को लेकर क्या ठोस नतीजे सामने आते हैं।







