दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र पर एक बार फिर से बारूद की गंध गहरी होती जा रही है। डूरंड लाइन पर पिछले कुछ दिनों से जो सुगबुगाहट चल रही थी, वह अब खुले संघर्ष में तब्दील होती दिख रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सरहद पर तनाव इस हद तक बढ़ चुका है कि कूटनीतिक वार्ताओं के दरवाजे लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं। द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड पड़ताल के अनुसार, हालिया पाकिस्तानी हवाई हमलों ने दोनों पड़ोसियों के बीच दशकों पुराने द्वेष को एक नए और खतरनाक पड़ाव पर लाकर खड़ा कर दिया है।
इस साल का 11वां हमला और बढ़ता मानवीय संकट
प्राप्त शुरुआती और जमीनी रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के भीतर विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की हैं। हेलमंद और अन्य सीमावर्ती इलाकों में हुए इन हमलों में अब तक 9 से लेकर 22 तक नागरिकों के मारे जाने की दर्दनाक खबरें सामने आ रही हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मरने वालों में बड़ी संख्या में मासूम बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। यह इस साल यानी 2024 में पाकिस्तान द्वारा अफगान भूभाग पर किया गया 11वां ऐसा बड़ा हमला माना जा रहा है, जिसने स्थानीय आबादी के बीच भय और आक्रोश का ज्वार पैदा कर दिया है।
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तालिबानी मंत्री की खुली चेतावनी: 'पेशावर में लहराएंगे झंडा'
इन हवाई हमलों के तुरंत बाद काबुल प्रशासन के तेवर बेहद आक्रामक हो गए हैं। अफगान तालिबान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने पाकिस्तान को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस्लामाबाद अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो वे महज दो दिनों के भीतर पेशावर में अपना झंडा फहरा देंगे। इस बयान ने पाकिस्तानी सैन्य और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। जानकारों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक जुबानी जंग नहीं है, बल्कि सीमा पार मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अफगान बलों के बीच कथित साठगांठ की ओर एक बड़ा इशारा है।
आतंकवाद का साया और डूरंड लाइन का विवाद
इस पूरे संघर्ष की जड़ें उस ऐतिहासिक डूरंड लाइन में निहित हैं जिसे कभी काबुल ने आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी। पाकिस्तान का तर्क है कि अफगान धरती का इस्तेमाल उसकी सीमा के भीतर आतंकी हमलों (विशेषकर TTP द्वारा) को अंजाम देने के लिए हो रहा है, और वह आत्मरक्षा में यह कदम उठा रहा है। दूसरी ओर, काबुल इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है और पाकिस्तानी हमलों को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताता है। इस दोतरफा खींचतान में सीमावर्ती क्षेत्रों के आम नागरिक पिस रहे हैं, जिनके घर और आजीविका इस बारूद की भेंट चढ़ रहे हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सैन्य दुस्साहस को तुरंत कूटनीति के जरिए नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष पूरे मध्य और दक्षिण एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर अमेरिका और यूरोपीय देश (जैसे फ्रांस व जर्मनी के बीच डीजल स्टॉक रिलीज जैसे मुद्दे) अपनी ऊर्जा और रणनीतिक प्राथमिकताओं में उलझे हैं, वहीं इस क्षेत्रीय संघर्ष पर वैश्विक ताकतों की ढीली पकड़ दक्षिण एशिया को एक बड़े मानवीय और सैन्य संकट की ओर धकेल रही है। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों से और खुलासे सामने आएंगे।







