अंतरराष्ट्रीय उड्डयन गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब फ्लाईदुबई की एक सामान्य दिखने वाली व्यावसायिक उड़ान आसमान में अचानक मौत के झूलों में तब्दील हो गई। कॉकपिट के भीतर हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम और विमान के अचानक गोता लगाने की घटना ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में जो सबसे बड़ा खुलासा सामने आ रहा है, वह यह है कि संबंधित सुरक्षा और खुफिया तंत्र के पास क्रू के हर सदस्य का ब्योरा पहले से मौजूद था। इसके बावजूद सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले ओमानी सह-पायलट को आखिरकार टेकऑफ का क्लीयरेंस कैसे और किन परिस्थितियों में मिल गया?
कॉकपिट में सन्नाटा और अचानक लगा जानलेवा गोता
विमान में सवार यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सब कुछ सामान्य चल रहा था तभी विमान अचानक रोलर-कोस्टर की भांति नीचे की ओर गिरने लगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेजी से विमान की ऊंचाई में आई गिरावट किसी तकनीकी विफलता से अधिक कॉकपिट में मौजूद मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम प्रतीत होती है। विमानन विशेषज्ञों ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के प्रारंभिक संकेतों के हवाले से बताया है कि सह-पायलट संभवतः उस वक्त कॉकपिट में अकेला था या उसने मुख्य पायलट को नियंत्रण से बाहर कर दिया था। इस अचानक हुए गोते ने विमान के अंदर भयावह स्थिति पैदा कर दी थी और यात्रियों की जान बाल-बाल बची।
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खुफिया जानकारी के बावजूद क्लीयरेंस का पहेलीनुमा जाल
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा निगरानी तंत्र, विशेष रूप से इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के पास संबंधित उड़ानों के चालक दल की अग्रिम जानकारी साझा की जाती रही है। जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि सुरक्षा डेटाबेस में चालक दल के सदस्यों का प्रोफाइल दर्ज था, तो ओमानी सह-पायलट के व्यवहार या पृष्ठभूमि पर कोई रेड फ्लैग क्यों नहीं जारी हुआ? सुरक्षा मानकों के तहत संवेदनशील रूटों पर उड़ानों के लिए पायलटों का बहुस्तरीय बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है। इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन के ग्राउंड ऑपरेशंस के बीच तालमेल की स्पष्ट खामी उजागर हो रही है।
सहकर्मियों का रुख और संदेह के दायरे में बाकी क्रू
जांच की दिशा केवल सह-पायलट तक सीमित नहीं है, बल्कि उड़ान से जुड़े अन्य क्रू मेंबर्स के रवैये ने भी जांच एजेंसियों का माथा ठनका दिया है। शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि घटना से ठीक पहले जब सह-पायलट की गतिविधियों पर संदेह व्यक्त किया गया था, तब कुछ साथी क्रू सदस्य उसे ड्यूटी से अलग किए जाने के विरोध में खड़े हो गए थे। जांच अधिकारी अब इस पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या चालक दल के अन्य सदस्यों का यह रुख केवल पेशेवर एकजुटता थी या इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश के तार जुड़े हुए थे।
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन आर. वर्गीज के अनुसार, 'जब कोई कमर्शियल विमान आसमान में असामान्य तरीके से गोता लगाता है, तो सिस्टम एरर और जानबूझकर किए गए कमांड में फर्क साफ देखा जा सकता है। क्रू का वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल टूटना सबसे खतरनाक पहलू है।'
ईरान का खंडन और भू-राजनीतिक तनाव
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस घटना को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे। हालांकि, तेहरान ने आधिकारिक स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम से अपना किसी भी प्रकार का संबंध होने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि व्यावसायिक उड़ानों की आड़ में राजनीतिक दुष्प्रचार फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्रों में उड़ान भरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए क्रू स्क्रीनिंग और कॉकपिट प्रोटोकॉल की समीक्षा अनिवार्य हो जाएगी।








