हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार का बड़ा कदम
देश के ऊर्जा क्षेत्र को एक नई दिशा देने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ते हुए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III (जीईसी-III) योजना को आधिकारिक तौर पर स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस बड़ी पहल के तहत देश भर में नवीकरणीय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को बेहद मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके।
पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत सरकार लगातार रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर और पवन ऊर्जा पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में इस नए चरण के तहत भारी-भरकम वित्तीय संसाधनों का आवंटन किया गया है, जो देश के पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क की तस्वीर बदलकर रख देगा। इस योजना से न केवल तकनीकी बाधाएं दूर होंगी, बल्कि सामान्य नागरिकों को भी ग्रिड से जुड़ी बिजली का सुचारू लाभ मिलेगा।
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1.86 लाख करोड़ रुपये के मेगा बजट का पूरा गणित
इस पूरी परियोजना का पैमाना बेहद विशाल है और इसके लिए सरकार ने तिजोरी खोल दी है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण पर कुल मिलाकर 1,86,405 करोड़ रुपये का भारी खर्च आएगा। इस भारी-भरकम बजट का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस कुल राशि में से राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली यानी इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, ऊर्जा भंडारण की आधुनिक तकनीक यानी 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) स्थापित करने पर 50,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का यह वित्तीय ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
केंद्र सरकार की बड़ी वित्तीय सहायता और राज्यों पर राहत
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केंद्र सरकार ने राज्यों पर वित्तीय बोझ को कम करने का पूरा ध्यान रखा है। परियोजना के तहत केंद्र सरकार अपनी ओर से 54,082 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस आर्थिक मदद का सीधा असर यह होगा कि राज्यों पर पारेषण शुल्क यानी ट्रांसमिशन चार्ज का बोझ ज्यादा नहीं बढ़ेगा।
जब राज्यों में ट्रांसमिशन शुल्क नियंत्रित रहेगा, तो उसका सीधा लाभ अंततः आम बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। जानकारों का मानना है कि इससे भविष्य में बिजली के दामों में होने वाली बेजा बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी और देशवासियों को किफायती दरों पर ऊर्जा मिल सकेगी। सरकार का यह कदम क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करते हुए हर हिस्से तक ग्रीन एनर्जी पहुंचाने में मददगार साबित होगा।
135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की खूबी
आज के समय में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई बार ग्रिड तक सही माध्यम न होने के कारण यह ऊर्जा बर्बाद हो जाती है या उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इस योजना के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को सुगमता से उत्पादन संयंत्रों से उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जब सूरज नहीं चमक रहा हो या हवा नहीं चल रही हो, तब बिजली की मांग कैसे पूरी की जाए। इस समस्या के समाधान के लिए योजना में 50 गीगावाट-घंटा की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली को जोड़ा गया है। इससे पीक ऑवर्स यानी जब बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है, तब भी बिना किसी बाधा के पर्याप्त बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
रोजगार के नए अवसर और वर्ष 2032-33 तक का लक्ष्य
इस पूरे प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के रोडमैप के अनुसार, यह पूरी परियोजना वर्ष 2032-33 तक पूरी तरह से जमीन पर उतर जाएगी। इतने बड़े पैमाने पर होने वाले बुनियादी ढांचे के विकास से देश के पावर सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होने की पूरी उम्मीद है।
"साफ-सुथरी बिजली। मजबूत ग्रिड। अधिक अवसर। हरित ऊर्जा गलियारा के तीसरे चरण से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पावरग्रिड मजबूत होंगे और विनिर्माण क्षेत्र में युवाओं के लिए नए रास्ते खुलेंगे।" — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि यह योजना भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2035 तक तय किए गए बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी। इससे एक तरफ जहां कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, वहीं दूसरी तरफ देश की ऊर्जा सुरक्षा भी पुख्ता होगी।








