नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता को लेकर देश के विभिन्न हलकों में बहस छिड़ गई है। उर्दू अखबारों और प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स में यह आवाज उठाई जा रही है कि चुनाव आयोग की साख इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। आलोचकों और कुछ विपक्षी नेताओं का यह कहना है कि संस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष दिखना चाहिए ताकि आम जनता का भरोसा चुनाव प्रक्रिया पर हमेशा की तरह मजबूत बना रहे।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का पक्ष इन तमाम तीखे सवालों के बीच पूरी तरह से अडिग नजर आता है। आयोग ने अपने आधिकारिक बयानों में स्पष्ट रूप से कहा है कि संस्था का हर एक फैसला और हर एक कदम सिर्फ और सिर्फ देश के संविधान और चुनाव कानूनों के दायरे में उठाया जाता है। आयोग का यह भी मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करना सबसे जरूरी काम है। चुनाव आयोग पर उठ रहे इन सवालों के बीच प्रशासनिक कामकाज अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और किसी भी तरह के दबाव से मुक्त होकर काम करने की बात कही जा रही है।
इंदौर में बूथ लेवल अधिकारियों का बड़ा सम्मेलन
इन तमाम राजनीतिक बहसों और मीडिया की सुर्खियों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का एक व्यस्त प्रशासनिक दौरा सामने आया है। वे मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पहुंचे हैं जहां वे बूथ लेवल अधिकारियों के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य मकसद जमीनी स्तर पर काम करने वाले चुनावी कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना और उन्हें मजबूत करना है। बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ चुनाव प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं जो सीधे मतदाताओं से जुड़े होते हैं। आयोग का पूरा जोर इस बात पर है कि जमीनी स्तर की कमियों को दूर करके मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह से त्रुटिहीन बनाया जाए।
इंदौर के इस सम्मेलन में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में पूरी मुस्तैदी से काम करें। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को हर हाल में चुनावी कामकाज की गुणवत्ता सुधारनी होगी। जमीनी स्तर के कर्मचारियों के साथ इस तरह की सीधी बैठकें यह साबित करती हैं कि आयोग प्रशासनिक सुधारों को लेकर गंभीर है। हालांकि, दिल्ली के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं का असर इस प्रशासनिक दौरे की कवरेज पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा है।
फर्जी खबरों और गलत जानकारियों से निपटने की सख्त चुनौती
आज के दौर में चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी और भ्रामक जानकारियों से निपटना बन गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में अधिकारियों से खास तौर पर यह अपील की है कि वे चुनावों के दौरान फैलने वाले झूठ और प्रोपेगेंडा का डटकर मुकाबला करें। उनका साफ कहना है कि डिजिटल युग में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं और इससे मतदाताओं के मन में भ्रम पैदा हो सकता है। चुनाव आयोग की यह कोशिश है कि सही समय पर सटीक जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को तुरंत रोका जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों को यह हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने इलाकों में नजर रखें और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली फर्जी खबरों का खंडन तुरंत करें। चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम बहुत जरूरी माना जा रहा है क्योंकि जरा सी अफवाह पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा सकती है। आयोग के इन कड़े निर्देशों के बाद अब देश भर के चुनावी अमले को और अधिक सतर्क कर दिया गया है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड पड़ताल यह बताती है कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की यह कार्यशैली और उस पर उठने वाले सवाल भारतीय लोकतंत्र की बहस का अहम हिस्सा बने रहेंगे।




