ट्रेन की पटरियों से सिल्वर स्क्रीन तक का सफर
सिनेमा की दुनिया में कब किसकी किस्मत बदल जाए, यह कोई नहीं जानता। इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही फिल्म 'हनुमान अंश' ने एक ऐसे कलाकार को देश के सामने लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी जिंदगी संघर्षों और अंधेरे के साए में गुजर रही थी। इस फिल्म का गाना 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' इन दिनों देश के हर कोने में गूंज रहा है। इस लोकप्रिय भजन को अपनी जादुई आवाज से सजाने वाले गायक सुनील लोधी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। जन्म से ही दृष्टिबाधित सुनील कभी अपनी आजीविका चलाने के लिए लोकल ट्रेनों में गाना गाया करते थे। उनकी इस सुरीली और रूहानी आवाज ने फिल्म मेकर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा और वे सीधे सिल्वर स्क्रीन तक पहुंच गए।
सुनील लोधी की यह सफलता सिर्फ एक गाने की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह उस अटूट जज्बे की दास्तान है जो हर विपरीत परिस्थिति को मात दे देता है। जब फिल्म की टीम ने उनकी आवाज सुनी तो उन्हें तुरंत महसूस हुआ कि यह प्रतिभा साधारण नहीं है। फिल्म की को-प्रोड्यूसर अनुप्रिया नगर ने एक इंटरव्यू में साझा किया था कि सुनील की आवाज में एक ऐसा ईश्वर प्रदत्त जादू है, जो सीधे सुनने वाले के दिल को छू लेता है। ट्रेन में गाकर अपने जीवन का पहिया चलाने वाले सुनील ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी बुंदेली लोक गायकी पूरे देश में इस तरह सिर आंखों पर बिठा ली जाएगी और उनकी यह अनूठी कला उनकी तकदीर बदल देगी।
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को-प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बढ़ाई मदद की हाथ
फिल्म 'हनुमान अंश' की बंपर सफलता के बीच इसकी को-प्रोड्यूसर अनुप्रिया नगर ने एक ऐसा मानवीय कदम उठाया है जिसकी चहुंओर प्रशंसा हो रही है। मात्र 21 वर्ष की उम्र में इतनी बड़ी फिल्म की कमान संभालने वाली अनुप्रिया ने अपनी टीम के इस खास सदस्य की सुध ली है। उन्होंने सुनील लोधी की आंखों के इलाज के लिए चिकित्सकीय प्रयास शुरू कर दिए हैं। अनुप्रिया ने मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने मुंबई के एक प्रतिष्ठित नेत्र विशेषज्ञ से सुनील की आंखों के परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट तय कर दिया है।
हालांकि अनुप्रिया ने यह भी साफ किया कि इस नेक काम का श्रेय अकेले उन्हें नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इस मुहिम में कई और लोग भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही सुनील ने अपनी आंखों का इलाज कराने की इच्छा जताई, उनकी टीम ने बिना एक पल गंवाए मेडिकल कंसल्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी। सुनील के मुंबई पहुंचते ही डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी आंखों की गहन जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के जरिए उनकी दृष्टि कितनी वापस लाई जा सकती है।
मध्य प्रदेश सरकार का भी मिला मजबूत साथ
सुनील लोधी की इस प्रेरणादायक यात्रा में अब देश और राज्य की सरकारों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले सुनील ने हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक गायक की प्रतिभा की भूरी-भूरी प्रशंसा की और उनके स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार सुनील के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और उन्हें हरसंभव सरकारी मदद मुहैया कराई जाएगी।
इस तरह से एक तरफ जहां फिल्म मेकर्स अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर भी उनके इलाज के रास्ते आसान किए जा रहे हैं। यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे कला, संवेदना और प्रशासनिक सहयोग मिलकर किसी जरूरतमंद इंसान की जिंदगी को पूरी तरह से रोशन कर सकते हैं। सुनील के परिवार और उनके चाहने वालों के बीच इस खबर के बाद से भारी उत्साह और उम्मीद का माहौल बना हुआ है।
विदेशों तक गूंजा 'हनुमान अंश' का सुर
सुनील लोधी की जादुई आवाज और 'हनुमान अंश' फिल्म का क्रेज अब देश की सीमाओं को लांघकर सात समंदर पार भी पहुंच चुका है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक विदेशी नागरिक का वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था। अमेरिकी जियोलॉजिस्ट, वैदिक मेडिटेशन टीचर और कीर्तन लीडर एलिक सोडरबर्ग ने सुनील के गाए हुए भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' को अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया था।
खास बात यह थी कि उस विदेशी कलाकार ने पारंपरिक भारतीय एकतारा खुद तैयार किया और उसकी अद्भुत धुन पर इस बुंदेली भजन को पूरी तन्मयता के साथ गाया। यह इस बात का प्रमाण है कि संगीत की कोई भाषा या भूगोल नहीं होता। सुनील लोधी के ठेठ देसी और ग्रामीण सुरों ने आज वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ दी है, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही फिल्म
सुनील लोधी के जीवन में आ रहे इस सकारात्मक बदलाव के पीछे जिस फिल्म का हाथ है, वह बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता की इबारत लिख रही है। बेहद सीमित बजट में तैयार की गई 'हनुमान अंश' ने सिनेमाघरों में जो धमाल मचाया है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। फिल्म ने महज कुछ ही हफ्तों में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 400 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर लिया है।
इस फिल्म की ताबड़तोड़ सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो और उसमें देश की संस्कृति व मिट्टी की खुशबू हो, तो दर्शक उसे सर आंखों पर बिठा लेते हैं। फिल्म की सफलता के साथ-साथ इसके गानों और कलाकारों को मिल रहा बेशुमार प्यार इस बात का सबूत है कि भारतीय सिनेमा अब उन कहानियों को भी अपना रहा है जो जमीनी हकीकत के बेहद करीब होती हैं।
"सुनील जी की आंखों का इलाज कराने की इच्छा और उनकी इस जिज्ञासा को देखते हुए हमने तुरंत मुंबई के डॉक्टर से संपर्क किया। हम सब चाहते हैं कि वह अपनी आंखों से इस खूबसूरत दुनिया को खुद देख सकें। यह हम सबकी संयुक्त कोशिश है।" — अनुप्रिया नगर, को-प्रोड्यूसर, 'हनुमान अंश'
निष्कर्ष: उम्मीद की एक नई सुबह
सुनील लोधी की यह कहानी केवल एक नेत्रहीन गायक के संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि इंसान की इच्छाशक्ति अगर मजबूत हो तो अंधेरे से भी उजाला छीना जा सकता है। कभी अंधेरी बोगियों में अपने सुरों से राहगीरों का दिल बहलाने वाले सुनील अब मेडिकल साइंस और अपनों के सहारे की बदौलत अपनी आंखों की दुनिया देखने की दहलीज पर खड़े हैं। यदि डॉक्टरों के ये प्रयास सफल होते हैं, तो यह न केवल सुनील के लिए बल्कि उनके करोड़ों चाहने वालों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।








