नई दिल्ली/होर्मुज: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर सुलग उठा है। इस रणनीतिक मार्ग से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज को सीधा निशाना बनाते हुए एक मिसाइल दागी गई। गनीमत यह रही कि इस भयानक हमले में पोत पर सवार पांचों भारतीय नाविकों की जान बाल-बाल बच गई और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम को अंतरराष्ट्रीय नौवहन स्रोतों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले आठ महीनों के भीतर इस हाई-टेंशन जोन में कम से कम 11 भारतीय नाविक इस तरह के जानलेवा सैन्य संघर्षों और हमलों के दायरे में आ चुके हैं।
रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में कैसे हुआ हमला?
प्राप्त शुरुआती जानकारियों और मैरीटाइम इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज जब होर्मुज के संकरे समुद्री गलियारे से गुजर रहा था, तभी अचानक आसमान से एक मिसाइल आकर पोत के पास फटी। धमाका इतना जबरदस्त था कि जहाज के ऊपरी हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा। हालांकि, कैप्टन और क्रू मेंबर की सूझबूझ से पोत पर आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। इस पोत पर सवार पांचों भारतीय नाविकों ने अपनी जान बचाने के लिए आपातकालीन शेल्टर में शरण ली थी। भारतीय समयानुसार घटना की सूचना मिलते ही मस्कट और क्षेत्रीय मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय हो गए और सभी भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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आठ महीनों में 11 भारतीय नाविकों की जान पर संकट
यह हमला कोई इकलक्की घटना नहीं है। पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण भू-राजनीतिक संघर्ष—विशेष तौर पर ईरान-अमेरिका तनाव और क्षेत्रीय प्रॉक्सी युद्धों—की आग अब समंदर के रास्ते भारत के आर्थिक हितों और नागरिकों को सीधे तौर पर झुलसा रही है। आधिकारिक आंकड़ों की समीक्षा से पता चलता है कि पिछले आठ महीनों में होर्मुज और लाल सागर के आसपास के इलाकों में 11 से अधिक भारतीय नाविक या तो जहाजों पर हमलों का शिकार बने हैं या उन्हें बंधक जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है। हर बार भारतीय विदेश मंत्रालय और नौसेना की त्वरित कूटनीति ने इन्हें सुरक्षित स्वदेश लाने में सफलता पाई है, लेकिन बार-बार मंडराता यह खतरा नाविकों के परिवारों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है।
व्यापारिक जहाजों और भारतीय क्रू के लिए बढ़ता जोखिम
वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग एक-पांचवां हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। ऐसे में, इन जलमार्गों का युद्ध का अखाड़ा बन जाना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ मर्चेंट नेवी के उन युवाओं के लिए भी मौत का कुआं बनता जा रहा है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को चला रहे हैं। शिपिंग कंपनियों पर अब यह दबाव बढ़ रहा है कि वे युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों में नाविकों की तैनाती से पहले पुख्ता सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करें।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रूस-यूक्रेन मोर्चे का वैश्विक असर
एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य में नाविकों की जिंदगी दांव पर लगी है, वहीं दूसरी ओर पूर्वी यूरोप यानी रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भी तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय समाचारों के लाइव अपडेट्स बताते हैं कि रूस द्वारा कब्जाए गए यूक्रेनी शहरों में बंदूक की नोक पर विवादास्पद मतदान और जनमत संग्रह कराए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक कूटनीति पूरी तरह बंटी हुई नजर आ रही है। इन दो अलग-अलग महाद्वीपीय संघर्षों (पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक खतरनाक अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है, जिसका सीधा असर अब आम नागरिकों और समुद्री कामगारों पर पड़ रहा है।
निष्कर्ष और आगे की राह
होर्मुज में हुआ यह ताजा मिसाइल हमला इस बात की तस्दीक करता है कि दुनिया के महाशक्तियों के बीच चल रहा संघर्ष अब समंदर के रास्ते सफर करने वाले निर्दोष पेशेवर नाविकों के लिए काल साबित हो रहा है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़े सुरक्षा गलियारे (Maritime Corridors) बनाने का दबाव डालना होगा। जब तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक आग ठंडी नहीं होती, तब तक होर्मुज के रास्ते हर भारतीय नाविक का सफर अनिश्चितता और जान के जोखिम के साये में ही जारी रहेगा।








