नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर इन दिनों सरगर्मी काफी तेज हो गई है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में विदेश मंत्री का पद संभाल रहे मार्को रुबियो आज अपने पांच दिवसीय दौरे पर भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में बहुत बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। पिछले काफी समय से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत चल रही थी, लेकिन बात किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई थी। अब रुबियो के इस भारत दौरे पर सबकी नजरें टिकी हैं ताकि दोनों देशों के बीच कारोबार से जुड़ी पुरानी अड़चनों को दूर किया जा सके।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस यात्रा का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देना और आयात शुल्क यानी टैरिफ से जुड़े विवादों का कोई व्यावहारिक रास्ता निकालना है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैक्स और भारतीय सामानों के अमेरिकी बाजार में प्रवेश को लेकर दोनों पक्षों के बीच खींचतान देखने को मिली थी। भारत सरकार चाहती है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों को बिना किसी बाधा के उचित जगह मिले, जबकि अमेरिका अपने कुछ उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में आसान पहुंच चाहता है। रुबियो की इस यात्रा के दौरान इन तमाम संवेदनशील व्यापारिक मुद्दों पर खुलकर बातचीत होने की पूरी संभावना है।
क्वाड देशों की बैठक में भी लेंगे हिस्सा
अपनी इस पांच दिन की लंबी यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो केवल द्विपक्षीय व्यापारिक मुद्दों पर ही चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि वह दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में भी शिरकत करेंगे। इस बहुपक्षीय मंच पर भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे बड़े विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के लिहाज से क्वाड की यह बैठक बहुत ज्यादा मायने रखती है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि व्यापारिक समझौते के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी इस उच्चस्तरीय वार्ता के केंद्र में रहने वाला है।
दिल्ली के साउथ ब्लॉक और अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों के बीच पिछले कई दिनों से इस दौरे की तैयारियों को लेकर मैराथन बैठकें चल रही हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दोनों देश आपसी आर्थिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, कृषि और डेयरी जैसे कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी मांगों को लेकर भारत का रुख हमेशा से सतर्क रहा है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो और भारतीय नेतृत्व के बीच इन मुद्दों पर क्या सहमति बनती है। क्या यह दौरा वाकई भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अमलीजामा पहनाने में कामयाब हो पाता है, यह आने वाले कुछ दिनों की वार्ताओं से ही पूरी तरह साफ हो पाएगा।
व्यापार और टैरिफ विवादों पर क्या निकलेगा रास्ता
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही आर्थिक बातचीत अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां दोनों देश किसी बड़े समझौते की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं। अमेरिका की तरफ से अक्सर भारतीय सामानों पर शुल्क को लेकर चिंता जताई जाती रही है, तो वहीं भारत ने भी अमेरिकी नीतियों पर अपनी बात मजबूती से रखी है। मार्को रुबियो का यह दौरा इस दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देता है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को कितनी प्राथमिकता दे रहा है। दोनों देशों के उद्योग जगत और कारोबारी संगठन इस यात्रा पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इस डील से कई सेक्टरों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है।
देश की राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा शुरू हो चुका है और अगले पांच दिनों तक लगातार उच्च स्तर की बैठकें होनी तय हैं। जैसे-जैसे बैठकें आगे बढ़ेंगी, व्यापार और टैरिफ से जुड़ी नई और पुख्ता जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही इस ट्रेड डील को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा होगी, हम सबसे पहले अपने पाठकों तक जमीनी सच पहुंचाएंगे। फिलहाल, इस बात के पूरे आसार हैं कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई दिशा और रफ्तार देने का काम करेगा।





