जिंदगी के फलसफे और जग्गू दादा का अनूठा अंदाज
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता जैकी श्रॉफ उर्फ 'जग्गू दादा' अपनी बेहतरीन एक्टिंग के साथ-साथ अपने बिंदास और जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए भी करोड़ों दिलों पर राज करते हैं। उनकी बातें जितनी सरल होती हैं, उनमें जिंदगी का उतना ही गहरा फलसफा छिपा होता है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, सफलताओं, असफलताओं और रिश्तों की अहमियत पर खुलकर बात की। उनका यह देसी अंदाज और बेबाकपन फैंस को बहुत पसंद आता है, क्योंकि वह बनावटी बातों से दूर रहकर सीधे दिल की बात करते हैं।
जैकी श्रॉफ का मानना है कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर इतना परेशान हो जाते हैं कि अपनी असली खुशियां खो बैठते हैं। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में लोगों को समझाया कि किस तरह छोटी सोच और दिखावे से दूर रहकर एक सुकून भरी जिंदगी बिताई जा सकती है। उनके ये विचार न केवल मनोरंजन जगत के लिए बल्कि आम इंसान के दैनिक जीवन के लिए भी एक बड़ी सीख हैं।
संबंधित खबरें
सफलता और रिश्तों के बीच खड़ी होती दीवारें
अपनी जिंदगी के शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए जैकी श्रॉफ ने एक बेहद भावुक बात साझा की। उन्होंने बताया कि जब इंसान मेहनत करके पैसे कमाता है और अपने परिवार को बेहतर सुख-सुविधाएं देता है, तो शुरुआत में बहुत खुशी मिलती है। लेकिन समय के साथ उस कामयाबी की कीमत भी चुकानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी मां को एक अलग बेडरूम दिया, तो उन्हें खुशी तो बहुत हुई, लेकिन उस तरक्की के साथ ही अपनों के बीच एक अदृश्य दीवार भी खड़ी हो गई।
एक्टर का कहना है कि लोग अक्सर दूसरों के गम को देखकर उसे कम आंकते हैं और अपना दुख सबसे बड़ा समझते हैं। जबकि असलियत इसके बिल्कुल विपरीत होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई इंसान जीवन में फिसलकर गिर जाता है, तो उस पर हंसने के बजाय उसका हाथ पकड़कर उसे उठाना चाहिए, क्योंकि दुनिया में वैसे ही तंज कसने वालों की कमी नहीं है। रिश्तों की मिठास को बनाए रखने के लिए दिलों के बीच की दूरियों को मिटाना बेहद जरूरी होता है।
सेहत है तो सब है: हेल्थ को लेकर बड़ी चेतावनी
जैकी दादा ने आज की युवा पीढ़ी और काम के तनाव में डूबे लोगों को सबसे बड़ी सीख यह दी कि जीवन में चाहे जितना भी प्रेशर हो, स्वास्थ्य को लेकर कभी तनाव नहीं लेना चाहिए। उनका यह मानना है कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तभी तक इस दुनिया में आपका वजूद है। सेहत के बिगड़ते ही इंसान सिर्फ एक 'बॉडी' बनकर रह जाता है। उन्होंने खुलकर कहा कि काम, पढ़ाई, पैसा और दुनियादारी का दबाव थोड़ा बहुत ठीक है, लेकिन हेल्थ का प्रेशर लेने से शरीर अंदर से खोखला हो जाता है।
"काम को प्रेशर लो, पढ़ाई का प्रेशर लो, पैसे का प्रेशर लो, दुनिया का प्रेशर लो, लेकिन हेल्थ का प्रेशर ना लो। क्योंकि हेल्थ है, तो सब है। हेल्थ गई तो सब गया। हेल्थ जाने के बाद आपका शरीर सिर्फ 'बॉडी' कहा जाता है।" — जैकी श्रॉफ, अभिनेता
उन्होंने अपने डेली रूटीन के बारे में बात करते हुए बताया कि वे सुबह उठते ही सबसे पहले अपने पैरों को छूते हैं और ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हैं। उनका मानना है कि खुद की इज्जत करना और अपने शरीर को समय देना हर इंसान का पहला कर्तव्य होना चाहिए। जरूरत से ज्यादा भागदौड़ और मानसिक तनाव इंसान को भीतर से कमजोर कर देते हैं, इसलिए समय रहते संभल जाना चाहिए।
दूसरों को नीचा दिखाकर कोई बड़ा नहीं बनता
इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिके रहने और दर्शकों का प्यार पाने वाले जैकी श्रॉफ का साफ तौर पर कहना है कि किसी को भी दूसरे इंसान को छोटा करके खुद बड़ा दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जो इंसान की किस्मत में लिखा होता है, उसे वही मिलता है। भविष्य की लंबी-चौड़ी योजनाएं बनाने से बेहतर है कि वर्तमान में जिया जाए और जो कुछ भी आपके पास है, उससे प्यार किया जाए।
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का किस्सा याद करते हुए बताया कि कैसे मीडियाकर्मियों की भीड़ में उन्होंने सबको शांत रहने और सांस लेने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिंदगी बहुत छोटी है, इसलिए इसे बेवजह के तनाव और भागदौड़ में खराब न करें। काम तो हमेशा आता और जाता रहेगा, लेकिन सांसें थम जाने के बाद कुछ भी हाथ नहीं बचता।
खानपान और पुरानी सादगी से जुड़ाव
जैकी श्रॉफ अपनी फिटनेस और सादगी के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में एक पुरस्कार समारोह के दौरान उन्होंने अभिनेत्री स्मृति ईरानी को भी वजन और खानपान को लेकर एक बहुत ही मजेदार और स्वास्थ्यवर्धक सलाह दी थी। उन्होंने हमेशा से सात्विक और घर के खाने को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि वे बचपन से वेजिटेरियन रहे हैं और उन्हें अपनी मां के हाथ का बना खाना सबसे ज्यादा पसंद है।
दिनभर की व्यस्तता के बावजूद वे अपने लिए समय निकालना नहीं भूलते। उनका जीवन यह सिखाता है कि शोहरत की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना और जमीन पर पैर टिके रहना ही असली इंसानियत है। जैकी दादा के ये विचार आज के दौर में हर उम्र के लोगों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणास्त्रोत हैं।





