नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से सबसे बड़ी चर्चा रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल शाखा जियो के पब्लिक इश्यू यानी आईपीओ को लेकर हो रही है। बाजार के जानकारों और ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाले कारोबारियों के बीच इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि देश का यह सबसे बड़ा टेलीकॉम और डिजिटल नेटवर्क जल्द ही शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार, जियो के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी उछलकर 151 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इस खबर के सामने आते ही आम निवेशकों और बड़े फंड हाउसों के बीच हलचल बढ़ गई है, और हर कोई इस संभावित शेयर के आने की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि ग्रे मार्केट में यह उछाल इस बात का सीधा संकेत है कि निवेशकों में इस कंपनी के शेयरों को लेकर कितना जबरदस्त क्रेज है। हालांकि, सेबी के नियमों के तहत ग्रे मार्केट का यह कारोबार आधिकारिक नहीं होता है, लेकिन यह बाजार के मूड को भांपने का एक बड़ा पैमाना माना जाता है। पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार में आई तेजी और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने कंपनियों के लिए आईपीओ लाने का एक अनुकूल माहौल तैयार किया है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी डेटा और टेलीकॉम कंपनी के शेयर बाजार में उतरने की खबर ने छोटे और बड़े निवेशकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
ग्रे मार्केट में क्यों बढ़ रहा है जियो का भाव?
जियो के शेयरों को लेकर ग्रे मार्केट में मची यह हलचल अचानक नहीं आई है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने देश के टेलीकॉम सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है और करोड़ों ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा है। कंपनी की प्रति ग्राहक कमाई में लगातार सुधार देखा गया है और इसका ब्रॉडबैंड तथा डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से फैल रहा है। यही वजह है कि जब भी बाजार में जियो के आईपीओ की सुगबुगाहट तेज होती है, तो ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम ऊपर की तरफ भागने लगता है। निवेशकों का मानना है कि जिस तरह रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों ने लंबी अवधि में शानदार रिटर्न दिया है, उसी प्रकार जियो भी शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद अपने निवेशकों को मालामाल कर सकती है।
दूसरी ओर, बाजार में अन्य कंपनियों के शेयरों की चाल पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। हाल के दिनों में कई छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। उदाहरण के लिए, पिछले कुछ सालों में कुछ चुनिंदा शेयरों ने अपने निवेशकों का पैसा कई गुना बढ़ाया है और दिग्गज निवेशकों ने भी इन कंपनियों में बड़ा दांव लगाया है। इसके बावजूद, जियो के आईपीओ का पैमाना इन सभी से कहीं बड़ा होने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब देश का सबसे बड़ा डिजिटल और टेलीकॉम प्लेयर प्राइमरी मार्केट में उतरेगा, तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक साबित हो सकता है।
निवेशकों को अभी क्या तैयारी करनी चाहिए?
इस ताजा अपडेट के बाद वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचना चाहिए, लेकिन अपनी वित्तीय तैयारी पूरी रखनी चाहिए। अपने बैंक खातों, डीमैट खातों और ट्रेडिंग खातों को पूरी तरह सक्रिय रखें ताकि जब भी कंपनी की तरफ से तारीखों का आधिकारिक ऐलान हो, आवेदन करने में किसी तरह की तकनीकी रुकावट न आए। आईपीओ बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों और बिजनेस मॉडल को ध्यान से पढ़ना हमेशा समझदारी का काम होता है। हालांकि जियो के मामले में ब्रांड का नाम और इसकी बाजार में हिस्सेदारी ही अपने आप में एक बड़ा भरोसा है, फिर भी हर निवेशक को अपने जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार ही पैसा लगाने की योजना बनानी चाहिए।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि जैसे-जैसे इस आईपीओ को लेकर नए आंकड़े सामने आ रहे हैं, सोशल मीडिया और शेयर बाजार के मंचों पर चर्चाएं गर्म हो रही हैं। आने वाले हफ्तों में रिलायंस इंडस्ट्रीज की आगामी आम बैठकों या आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। तब तक ग्रे मार्केट का यह 151 रुपये का आंकड़ा निवेशकों के उत्साह को और अधिक बढ़ाने का काम कर रहा है। यदि आप भी इस संभावित आईपीओ में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो अपने फंड का इंतजाम अभी से पुख्ता कर लें ताकि सही समय पर सही फैसला लिया जा सके।







