इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक पिच पर एक बार फिर तनाव की सुई को चरम पर पहुंचा दिया है। 'द फ्रीलान्स' के डेस्क पर मौजूद अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि इस क्षेत्र में कभी भी बड़ा सैन्य विस्फोट हो सकता है। नेतन्याहू की सीधी चेतावनी—'उस पायलट को भेजने वाले को चुकानी होगी भारी कीमत'—ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल अब किसी भी सामरिक दुस्साहस का सीधा और मुंहतोड़ जवाब देने के मूड में है।
नेतन्याहू की खुली चेतावनी और क्षेत्रीय उबाल
मध्य-पूर्व के आसमान पर मंडराते युद्ध के काले बादलों के बीच नेतन्याहू का यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही छिटपुट संघर्ष जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की तमाम मनाही और कूटनीतिक दबावों के बावजूद, इजरायली सेना ने हाल ही में ईरान से जुड़े ठिकानों और रणनीतिक बिंदुओं पर बमबारी कर अपनी आक्रामक नीति का परिचय दिया है। नेतन्याहू प्रशासन का यह रवैया इस बात का प्रतीक है कि इजरायल अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं पर किसी भी बाहरी दबाव को हावी नहीं होने देगा, भले ही इसके परिणाम क्षेत्रीय युद्ध के रूप में क्यों न सामने आएं।
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फ्लाइदुबई की घटना और 'स्मित मच्छर' का रहस्य
इस बीच, हाल ही में घटी एक अजीबोगरीब और सनसनीखेज घटना ने इस कूटनीतिक और सैन्य तनाव को एक नया मोड़ दे दिया है। 'फ्लाइदुबई' की एक उड़ान के दौरान घटी घटना, जिसमें एक को-पायलट द्वारा 'स्मित मच्छर' (या कथित संदिग्ध गतिविधि) पर कार्रवाई की खबरें आईं, ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी उलझन में डाल दिया है। हालांकि मुख्य धारा की मीडिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे हवाई सुरक्षा और मध्य-पूर्व के संवेदनशील एयरस्पेस में बढ़ते तनाव का ही एक उप-उत्पाद मान रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति की अनिच्छा और नेतन्याहू का 'ठेंगा'
विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच के रिश्ते वर्तमान में एक नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन मध्य-पूर्व में एक और व्यापक युद्ध में सीधे तौर पर उलझने से बचना चाहता है, क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी घरेलू राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। इसके बावजूद, नेतन्याहू द्वारा अमेरिकी चेतावनियों को दरकिनार करते हुए ईरान समर्थित ताकतों पर लगातार हमले करना यह साबित करता है कि इजरायल अपनी रक्षा रणनीति के क्रियान्वयन में पूरी तरह स्वतंत्र निर्णय ले रहा है। अब दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल सबसे बड़ा है कि इस स्थिति पर नवनिर्वाचित या वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व (ट्रंप) की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी।
क्या क्षेत्रीय शांति हमेशा के लिए अछूती हो गई है?
ग्राउंड रिपोर्टिंग और खुफिया इनपुट संकेत देते हैं कि कूटनीति के तमाम दरवाजे फिलहाल बंद होते नजर आ रहे हैं। गाजा से लेकर लेबनान और ईरान की सीमाओं तक, हर जगह मिलिशिया समूहों और नियमित सेनाओं के बीच टकराव तेज हो गया है। यदि नेतन्याहू अपनी चेतावनी को जमीन पर उतारते हैं और ईरान या उसके प्रॉक्सी इसका पलटवार करते हैं, तो मध्य-पूर्व का यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी आंच पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति तक पहुंचेगी। 'द फ्रीलान्स' इस सुलगते हुए मोर्चे पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।








