युवाओं के भविष्य को संवारने की अनूठी पहल
आज के दौर में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद युवाओं के लिए रोजगार पाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। डिग्री और डिप्लोमा हासिल करने के बाद भी अनुभव की कमी के चलते नौजवानों को मनमुताबिक नौकरियां नहीं मिल पाती हैं। इसी समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है और युवाओं को इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार करने का बीड़ा उठाया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने का हुनर सिखाना है, ताकि वे भविष्य में आसानी से बेहतर रोजगार पा सकें।
इस कड़ी में मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों और विद्युत गृहों में युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का ऐलान किया है। इस कार्यक्रम के तहत कुल 559 पदों पर ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। जो युवा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, उनके लिए यह योजना किसी बड़े अवसर से कम नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम युवाओं की कार्यकुशलता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब कोई युवा किसी बड़े संस्थान के साथ जुड़कर असल कामकाजी माहौल को नजदीक से देखता है, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस योजना को लेकर राज्यभर के युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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विद्युत उत्पादन और तकनीकी क्षेत्रों में सीखने का बड़ा मौका
मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के तहत युवाओं को केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि विभिन्न ट्रेड और कार्यश्रेणियों में प्रशिक्षण के द्वार खोले गए हैं। चयनित उम्मीदवारों को जबलपुर स्थित पावर कंपनी के मुख्य कार्यालय के अलावा राज्यभर में फैले विभिन्न जल और ताप विद्युत गृहों में काम करने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें बिजली उत्पादन से जुड़ी तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त होगा।
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को इलेक्ट्रीशियन, इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, सिस्टम मेंटेनेंस, कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर (हिंदी और अंग्रेजी), सिविल इंजीनियरिंग, मानव संसाधन यानी एचआर, और अकाउंट्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुनरमंद बनाया जाएगा। इन सभी क्षेत्रों में आज के समय में इंडस्ट्री की मांग बहुत ज्यादा है।
प्रशिक्षण के इस सफर के दौरान युवा अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर संबंधित कार्यक्षेत्र की कार्यप्रणाली को सीखेंगे। यह अनुभव न केवल उनके रिज्यूमे को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में उन्हें नौकरी के साक्षात्कार के दौरान दूसरों की तुलना में बढ़त भी दिलाएगा।
ट्रेनिंग के साथ-साथ आर्थिक मदद और स्टाइपेंड का प्रावधान
अक्सर देखा गया है कि आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतिभावान युवा प्रोफेशनल ट्रेनिंग या इंटर्नशिप करने से कतराते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस योजना में स्टाइपेंड का बेहतरीन प्रावधान किया है। योजना के नियमों के मुताबिक, जब प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो जाएगा और उसका एक महीना पूरा हो जाएगा, उसके बाद से हर महीने तय नियमों के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी।
प्रशिक्षणार्थियों को उनकी कार्यश्रेणी और पात्रता के आधार पर हर महीने 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का स्टाइपेंड सीधे उनके खातों में भेजा जाएगा। यह वित्तीय मदद युवाओं को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में संबल प्रदान करेगी, जिससे वे बिना किसी मानसिक दबाव के पूरी लगन के साथ अपना प्रशिक्षण पूरा कर सकेंगे।
यह बात ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के तहत मिलने वाले ये पद पूरी तरह से प्रशिक्षण के उद्देश्य से हैं। इन्हें किसी भी स्थिति में नियमित सरकारी नौकरी या स्थायी रोजगार नहीं माना जाएगा। हालांकि, इस ट्रेनिंग के जरिए मिलने वाला अनुभव और स्किल सेट युवाओं के लिए भविष्य के रास्ते जरूर खोल देगा।
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ और क्या है पात्रता?
इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश और पात्रता शर्तें तय की हैं। सबसे पहली और मुख्य शर्त यह है कि आवेदक का मध्य प्रदेश का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य है। इसके अलावा, उम्मीदवार की आयु सीमा 18 वर्ष से कम और 29 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। यानी 18 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवा ही इसके लिए पात्र माने जाएंगे।
शैक्षणिक योग्यताओं की बात करें तो अलग-अलग ट्रेड के अनुसार योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। इसमें बारहवीं कक्षा पास, आईटीआई डिप्लोमाधारक, और विभिन्न विषयों में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर चुके युवा आवेदन कर सकते हैं। तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों ही श्रेणियों के युवाओं के लिए इसमें उचित अवसर रखे गए हैं ताकि कोई भी योग्य नौजवान इस लाभ से वंचित न रह जाए।
"युवाओं को केवल डिग्रियां देने से काम नहीं चलेगा, उन्हें हुनरमंद बनाना हमारी प्राथमिकता है। ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के जरिए हमारे नौजवान आने वाले समय में हर तरह की कॉर्पोरेट और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे।" — औद्योगिक प्रशिक्षण विशेषज्ञ
ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया और अंतिम तिथि
जो युवा इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है ताकि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इच्छुक उम्मीदवारों को मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
पंजीयन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवेदकों के पास समग्र आईडी और आधार कार्ड होना आवश्यक है, साथ ही आधार की ई-केवाईसी प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर निर्धारित की गई है। अभ्यर्थी 15 अक्टूबर की रात 11:59 बजे तक ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। समयसीमा समाप्त होने के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
यदि किसी युवा को आवेदन भरने में किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी या कठिनाई आती है, तो वे अपने नजदीकी जिला स्तरीय आईटीआई संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी युवाओं की हरसंभव मदद करेंगे ताकि वे आसानी से अपना फॉर्म सबमिट कर सकें।








