देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मतदाता सूची से नाम हटाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक नए वीडियो में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका आक्रामक तेवर में नजर आ रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
वीडियो में आशुतोष रांका को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, "हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। उन्होंने मतदाताओं के नाम हटाने से पहले हमारी अनुमति नहीं ली, तो फिर सरकार हमसे विरोध प्रदर्शन करने के लिए अनुमति लेने की उम्मीद क्यों कर रही है?"
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इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां नागरिक अधिकारों के समर्थक और कुछ संगठन इस प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े नियमों का पालन करने की बात भी जोर-शोर से उठाई जा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग या सरकार के किसी उच्च पदस्थ अधिकारी की ओर से इस विशेष बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पत्रकारिता के मानदंडों के तहत 'द फ्रीलान्स' ने इस मामले की जमीनी और डिजिटल प्राथमिक पड़ताल की है, जिसमें यह स्पष्ट हुआ है कि यह वीडियो मुंबई में हुए एक स्थानीय विरोध प्रदर्शन के दौरान का है। लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने के अधिकार और प्रशासनिक अनुमति के बीच की यह बहस अब तूल पकड़ती जा रही है।








