महाराष्ट्र की राजनीति में मुंब्रा एक बार फिर बड़े सियासी घटनाक्रम का गवाह बन रहा है। महानगरपालिका चुनाव के बाद ‘पूरा मुंब्रा आने वाले समय में हरा करना है’ कहकर सुर्खियों में आईं AIMIM की पार्षद सहर शेख के पिता युनुस शेख ने एकनाथ शिवसेना का दामन थाम लिया है। उनकी बेटी AIMIM के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं, जबकि उनके पिता अब शिवसेना से जुड़ी एक इकाई में जिम्मेदारी संभालेंगे। हिंदुत्व की राजनीति करने वाली शिंदे की शिवसेना में युनुस शेख की एंट्री को लेकर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा है।
युनुस शेख को शिवसेना के स्थानीय पदाधिकारियों ने पार्टी से संबद्ध इकाई में प्रवेश दिया है। उन्हें कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र में केबल ऑपरेटरों से जुड़ी केबल सेना का अध्यक्ष बनाया गया है। बताया जा रहा है कि यह जिम्मेदारी मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि युनुस शेख ने इसे लेकर अपनी सफाई भी दी है।
केबल ऑपरेटर के रूप में काम करने का दिया हवाला
खबर सामने आते ही युनुस शेख ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक प्रवेश नहीं है, बल्कि केबल ऑपरेटरों से जुड़ी संस्था में उन्हें जिम्मेदारी दी गई है। उनके मुताबिक, वह पिछले 40 साल से केबल ऑपरेटर के तौर पर कारोबार कर रहे हैं और इसी सिलसिले में उन्हें यह पद सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विकास कार्यों से प्रभावित होकर लोग शिवसेना से जुड़ रहे हैं, लेकिन उनकी यह नियुक्ति विशुद्ध रूप से व्यावसायिक संस्था से जुड़ी है।
गौरतलब है कि युनुस शेख लंबे समय तक एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड के साथ जुड़े रहे थे, लेकिन पिछले चुनावों में टिकट न मिलने के कारण उन्होंने अपनी बेटी को AIMIM के टिकट पर मैदान में उतारा था, जहां सहर शेख ने शानदार जीत दर्ज की थी।
बेटी के पार्षद पद पर मंडराया संकट
एक तरफ जहां युनुस शेख को शिवसेना से जुड़ी इकाई में पद मिला है, वहीं दूसरी ओर उनकी बेटी सहर शेख के पार्षद पद पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। एनसीपी (अजित पवार गुट) की एक कार्यकर्ता ने सहर शेख और उनके पिता के OBC प्रमाणपत्रों के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फर्जी तरीके से और प्रक्रिया की अनदेखी कर ये प्रमाणपत्र हासिल किए गए हैं।
तहसीलदार स्तर पर हुई जांच में प्रक्रियागत कमियां सामने आने के बाद मामले को जाति वैधता समिति के पास भेज दिया गया है। फिलहाल, समिति के निर्णय पर ही सहर शेख का राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है। इन दोनों घटनाक्रमों के एक साथ सामने आने से इलाके का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ा हुआ है।
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