नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है क्योंकि इसे ईरान के खिलाफ पाकिस्तान के खुलकर सामने आने के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा और कूटनीति के जानकारों का मानना है कि इस कदम से मध्य पूर्व के देशों में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के इस कदम से यमन के संघर्ष में एक नया मोर्चा खुल गया है। अभी तक पाकिस्तान इस जंग में सीधे तौर पर शामिल होने से बचता रहा है, लेकिन ताजा हवाई हमलों ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की यह सीधी सैन्य कार्रवाई आने वाले दिनों में ईरान और उसके समर्थित समूहों के साथ तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकती है।
यमन के आसमान में उड़े पाकिस्तानी फाइटर जेट्स
यमन की जंग में पाकिस्तान की इस कथित सीधी एंट्री ने दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों को चौंका दिया है। पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि पाकिस्तानी वायुसेना ने हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाकों को निशाना बनाया है। हालांकि, अभी तक पाकिस्तान की सरकार या सेना की तरफ से इस सैन्य कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, शुरुआती खुफिया रिपोर्ट्स इशारा कर रही हैं कि यह हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस हमले के पीछे खाड़ी के देशों के साथ पाकिस्तान के गहरे होते सैन्य और आर्थिक संबंध हो सकते हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अपने आर्थिक संकट से उबरने के लिए खाड़ी के अमीर देशों की मदद पर निर्भर रहा है। ऐसे में, हूती ठिकानों पर हमला करके पाकिस्तान ने क्षेत्रीय राजनीति में अपने सहयोगियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साफ तौर पर जाहिर कर दिया है।
ईरान के खिलाफ खुल गया जंग का नया मोर्चा?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू ईरान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्ते हैं। ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच वैचारिक और रणनीतिक संबंध जगजाहिर हैं। ऐसे में, पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों द्वारा हूतियों पर हमला किए जाने को ईरान के खिलाफ सीधी चुनौती माना जा रहा है। तेहरान की तरफ से अभी तक इस पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि ईरान इसे अपने सुरक्षा घेरे में सेंध के रूप में देखेगा।
आम नागरिकों और स्थानीय जानकारों के बीच इस बात की चर्चा है कि क्या यह हमला मध्य पूर्व को एक व्यापक युद्ध की तरफ धकेल देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री इलाकों में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। ओमान और ईरान के बीच हालिया कूटनीतिक गतिविधियों के बीच पाकिस्तान का यह सैन्य हस्तक्षेप हालात को और ज्यादा जटिल बना रहा है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। विभिन्न रक्षा स्रोतों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स से मिले संकेतों के आधार पर यह साफ है कि पाकिस्तान अब मध्य पूर्व के संघर्ष में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ईरान और उसके सहयोगी इस हमले का क्या जवाब देते हैं और क्या पाकिस्तान इसमें और गहराई तक उतरेगा।









