पाकिस्तान की सेना इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक और रणनीतिक संकट से गुजर रही है। द फ्रीलान्स की ऑन-द-ग्राउंड खोजी रिपोर्ट के अनुसार, देश के भीतर हालात तेजी से पाकिस्तानी सैन्य तंत्र के नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की महिला विंग ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जनता का आक्रोश उफान पर है, जहां लोग LoC की तारबंदी तोड़कर भारत में शामिल होने की मांग कर रहे हैं।
बलूचिस्तान में बीएलए की महिला ब्रिगेड का कहर
क्षेत्रीय खुफिया रिपोर्ट्स और स्थानीय मीडिया के हवाले से सामने आया है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की फतह स्क्वाड यानी महिला ब्रिगेड अब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। हाल ही में इस महिला ब्रिगेड ने एक सुनियोजित कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के 9 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और इसका वीडियो भी जारी किया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बलूच विद्रोहियों की रणनीति अब और अधिक आक्रामक और घातक हो गई है। पारंपरिक पुरुष लड़ाकों के साथ-साथ महिलाओं का इस तरह मोर्चे पर आना और पाकिस्तानी फौज को सीधे चुनौती देना सैन्य नेतृत्व की नींद उड़ाए हुए है।
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PoK में सुलगता जनाक्रोश और भारत से जुड़ने की गूंज
दूसरी तरफ, नियंत्रण रेखा (LoC) के इस पार की स्थिति से बिल्कुल उलट PoK के अंदरूनी हिस्सों में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ अभूतपूर्व असंतोष देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से मुजफ्फराबाद से लेकर मीरपुर तक स्थानीय नागरिक महंगाई, मानवाधिकारों के हनन और पाकिस्तानी सेना के दमनकारी रवैये के खिलाफ सड़कों पर हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि प्रदर्शनकारियों के बीच से LoC की तारबंदी को हटाकर भारत की सीमा में दाखिल होने की मांग उठने लगी है। जनता का यह खुला विद्रोह इस बात का संकेत है कि PoK के आम अवाम का पाकिस्तानी शासन से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है।
सैन्य दमन बनाम जनभावनाओं का ज्वार
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान और PoK दोनों ही जगहों पर अपनी क्रूरता बढ़ा दी है। दमनकारी नीतियां, इंटरनेट ब्लैकआउट और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां आम बात हो गई हैं। इसके बावजूद, जनता का डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। बलूचिस्तान में सशस्त्र प्रतिरोध और PoK में नागरिक असहयोग आंदोलन ने पाकिस्तानी इस्टेब्लिशमेंट को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। सेना के भीतर भी इस बात की सुगबुगाहट है कि वे एक साथ अंदरूनी मोर्चों पर कितने लंबे समय तक टिक पाएंगे।
कूटनीतिक और सामरिक परिणाम
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। जिस प्रकार से PoK की जनता भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है और बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है, उसने इस्लामाबाद के हुक्मरानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में यदि यह असंतोष और अधिक व्यापक हुआ, तो यह पाकिस्तान के भौगोलिक और राजनीतिक ढांचे को अंदर से खोखला करने के लिए काफी होगा।
"जब एक सेना अपनी ही जनता के खिलाफ युद्ध छेड़ देती है, तो उसके पतन की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है—बलूचिस्तान से PoK तक आज यही दृश्य नजर आ रहा है।"










