पाकिस्तान से एक बेहद ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ की एक मेधावी फिजिक्स गोल्ड मेडलिस्ट युवती ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। यह मामला शिक्षा के नाम पर चल रहे बड़े फ्रॉड से जुड़ा है। मृतका ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला पाने का सपना देखा था। लेकिन इस सपने को पूरा करने के चक्कर में वह एक शातिर ठगी का शिकार हो गई। धोखेबाजों ने उससे और उसके परिवार से करीब 93 लाख रुपये ठग लिए थे।
शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि इस छात्रा ने अपनी पढ़ाई में हमेशा टॉप किया था। वह फिजिक्स विषय में गोल्ड मेडलिस्ट थी। विदेश के बड़े संस्थान में पढ़ने की उसकी इच्छा थी। इसके लिए उसने ऑनलाइन संपर्क साधा था। ठगों ने उसे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन पक्का करने का झांसा दिया था। शातिर लोगों ने फर्जी दस्तावेज और ईमेल के जरिए उसे अपने जाल में फंसा लिया था। धीरे-धीरे करके उससे बहुत बड़ी रकम ऐंठ ली गई।
जमीन बेचकर जुटाए थे पैसे
इस बड़े फर्जीवाड़े का शिकार बनी छात्रा का परिवार बहुत अमीर नहीं था। हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की भारी फीस और अन्य खर्चों को उठाने के लिए उनके पास पर्याप्त धन नहीं था। बेटी के सुनहरे भविष्य के खातिर परिवार ने अपनी इकलौती जमीन बेच दी। रिश्तेदारों से भी कर्ज लिया गया था। खून-पसीने की गाढ़ी कमाई जोड़कर 93 लाख रुपये इकट्ठा किए गए थे। इन पैसों को ठगों के बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था।
पैसे देने के बाद जब एडमिशन का असली पत्र नहीं आया तो शक गहराया। छात्रा ने जब यूनिवर्सिटी के स्तर पर अपनी पड़ताल की तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे पता चला कि उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। जिन लोगों ने एडमिशन कराने का वादा किया था, उनके फोन नंबर बंद हो चुके थे। वह वेबसाइट भी फर्जी निकली जिसके जरिए संपर्क किया गया था। अपनी सारी मेहनत और परिवार की जमा-पूंजी लुट जाने का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाई।
डिग्री और मेडल धरे रह गए
एक मेधावी छात्र का इस तरह दुनिया से चले जाना शिक्षा व्यवस्था और साइबर अपराधों की काली सच्चाई को उजागर करता है। देश-विदेश के नामी विश्वविद्यालयों के नाम पर छात्रों को ठगने वाले गिरोह सक्रिय हैं। यह छात्रा फिजिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट होने के बावजूद इन ठगों के शातिर जाल को नहीं पहचान पाई। ऑनलाइन ठगी के इन मामलों में अक्सर भोले-भाले लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी बेटी को धोखा देने वाले इन आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। साथ ही उनके द्वारा ठगे गए पैसों को भी वापस दिलाया जाए। यह घटना हर उस छात्र और अभिभावक के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो विदेश में पढ़ाई के नाम पर बिना पूरी जांच-पड़ताल के बड़े कदम उठाते हैं।
साइबर ठगी और फर्जी एजेंटों का जाल
आज के दौर में सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए ठगी के रास्ते बहुत आसान हो गए हैं। छात्र अक्सर बिना सोचे-समझे ऐसे लोगों के संपर्क में आ जाते हैं जो बड़े-बड़े वादे करते हैं। हार्वर्ड या ऑक्सफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन की एक तय प्रक्रिया होती है। कोई भी एजेंट सीधे तौर पर पैसे लेकर सीट पक्की करने का दावा नहीं कर सकता। लेकिन मजबूरी और सपनों के फेर में फंसे युवा इन बातों को समझ नहीं पाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी विदेशी संस्थान में दाखिला लेने से पहले आधिकारिक वेबसाइट से ही पूरी जानकारी लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के खाते में बड़ी रकम भेजने से बचना चाहिए। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जागरूकता की कमी किस तरह लोगों की जान ले रही है। पाकिस्तान पुलिस अब इस मामले में साइबर सेल की मदद ले रही है ताकि उन ठगों तक पहुंचा जा सके जिन्होंने एक होनहार बेटी की जान ले ली।








