घरों की शोभा बढ़ाने और सुरक्षा के लिए पाले जाने वाले वफादार जानवर कई बार कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसका अंदाजा हाल ही में सामने आए डरावने मामलों से लगाया जा सकता है। महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक लोग शान से कुत्ते पालते हैं, लेकिन कई बार जरा सी असावधानी घर के बुजुर्गों या बीमार सदस्यों के लिए भारी पड़ जाती है। डॉक्टरों के पास ऐसे मामले लगातार पहुंच रहे हैं जहां पालतू कुत्तों ने अपने ही मालिकों पर जानलेवा हमला कर दिया। इन घटनाओं में साधारण खरोंच से लेकर हड्डियों के टूटने तक की गंभीर स्थितियां बन चुकी हैं, जिसने पशु प्रेमियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पिल्लों के बाड़े की सफाई बनी मुसीबत, बुजुर्ग महिला की टूटी हाथ की हड्डी
एक चौंकाने वाले मामले में सतह पर शांत दिखने वाले कुत्ते ने अपनी ही मालकिन को बुरी तरह जख्मी कर दिया। घटना तब हुई जब एक बुजुर्ग महिला अपने पालतू कुत्ते के बच्चों के रहने की जगह की साफ-सफाई कर रही थी। अचानक जानवर ने आक्रामक रुख अपनाते हुए महिला पर हमला बोल दिया। उसने शरीर के विभिन्न हिस्सों पर एक से ज्यादा बार काटा, जिसमें बाएं हाथ, कलाई और हथेली के हिस्से बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए।
हमला इतना भयानक था कि महिला की कलाई के पास की मुख्य हड्डी यानी रेडियस में फ्रैक्चर आ गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को इलाज के दौरान खासी मशक्कत करनी पड़ी। घावों की गहराई और संक्रमण के गंभीर खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने शुरुआत में जख्मों को पूरी तरह सील करने से परहेज किया। लगातार एंटीबायोटिक देने और नियमित रूप से पट्टियां बदलने के बाद संक्रमण को नियंत्रित किया जा सका, तब जाकर मरीज को राहत मिली।
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बिस्तर पर लेटी बुजुर्ग महिला पर हमला, शरीर की त्वचा उतरी
दूसरा मामला और भी अधिक संवेदनशील है, जो गतिशीलता की कमी से जूझ रहे बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक बुजुर्ग महिला जो पिछले कई वर्षों से लकवाग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर ही रहती हैं, वे भी इस खौफनाक हादसे का शिकार हो गईं। महिला अपने बिस्तर पर लेटी हुई थीं, तभी पालतू कुत्ते ने उन पर अचानक धावा बोल दिया।
इस हमले में महिला की बाईं बांह की त्वचा बुरी तरह छिल गई और खाल अंदरूनी ऊतकों से पूरी तरह अलग हो गई। क्षतिग्रस्त क्षेत्र करीब पच्चीस सेंटीमीटर के दायरे में फैल चुका था, जिसे देखकर चिकित्साकर्मियों के भी होश उड़ गए। डॉक्टरों ने सबसे पहले घाव की गहरी सफाई कर संक्रमण रोकने के उपाय किए। सूजन कम होने के बाद सर्जरी के जरिए जख्म के आकार को छोटा किया गया और रेबीज से बचाव के टीके दिए गए।
डॉक्टरों की चेतावनी: जानवर के काटने से शरीर के अंदरूनी हिस्से हो जाते हैं क्षतिग्रस्त
चिकित्सकों का कहना है कि लोग अक्सर कुत्ते के काटने को मामूली खरोंच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो कि बहुत खतरनाक भूल साबित हो सकती है। कुत्ते के जबड़े की ताकत इतनी अधिक होती है कि वह सिर्फ ऊपरी त्वचा को ही नहीं चीरता, बल्कि मांसपेशियों, नसों, रक्त वाहिकाओं और हड्डियों को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है।
"कुत्तों के काटने से होने वाले घाव सामान्य चोटों की तरह नहीं होते। इनमें बैक्टीरिया का खतरा बहुत ज्यादा होता है जो सीधे खून में मिलकर सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। पालतू जानवरों के मामले में भी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।" — डॉ. आलोक शर्मा, वरिष्ठ सर्जन
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कुत्ते स्तनपान करा रहे हों या उनके आसपास छोटे पिल्ले हों, तो उनका स्वभाव अधिक आक्रामक हो जाता है। ऐसे समय में बच्चों और बुजुर्गों को उनके करीब बिल्कुल नहीं जाने देना चाहिए। थोड़ी सी भी असावधानी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
हादसा होने पर तुरंत अपनाएं ये जरूरी उपाय
यदि दुर्भाग्यवश किसी को कुत्ते या किसी अन्य जानवर ने काट लिया है, तो शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। सबसे पहले घाव को बहते हुए साफ पानी और साबुन से कम से कम पंद्रह मिनट तक धोना चाहिए। ऐसा करने से मुंह से आए अधिकांश बैक्टीरिया और वायरस बाहर निकल जाते हैं।
इसके बाद तुरंत किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल का रुख करना चाहिए। डॉक्टरों की सलाह के बिना घाव पर मिर्ची, हल्दी, तेल या किसी भी तरह का अज्ञात लेप लगाने से बचना चाहिए। ऐसे घरेलू नुस्खे संक्रमण को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि पालतू कुत्ते को समय पर रेबीज और अन्य सभी जरूरी टीके लगवाए गए हों।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- सवाल: क्या घर में पले हुए कुत्ते भी रेबीज फैला सकते हैं?
जवाब: हां, अगर पालतू कुत्ते को समय पर एंटी-रेबीज का टीका नहीं लगाया गया है और वह बाहर के अन्य आवारा कुत्तों के संपर्क में आता है, तो वह भी इस बीमारी का वाहक बन सकता है। - सवाल: कुत्ते के काटने पर पहला कदम क्या होना चाहिए?
जवाब: सबसे पहले घाव को बहते पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें और बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। - सवाल: बुजुर्गों के मामले में यह खतरा क्यों बढ़ जाता है?
जवाब: बुजुर्गों की त्वचा और हड्डियां कमजोर होती हैं, जिससे छोटे हमले भी गंभीर फ्रैक्चर या बड़े जख्मों में बदल जाते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर यही कहा जा सकता है कि घर में पालतू जानवर रखना अच्छा शौक है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। परिवार के बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर टीकाकरण बड़े हादसों से बचा सकता है।








