नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम को संबोधित करते हुए भारत की लोकतांत्रिक ताकत को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की असली जननी भी है। इस फोरम में प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, शक्ति के संतुलन और तकनीकी विकास पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने तकनीक के इस्तेमाल पर बहुत जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक का मतलब किसी एक देश या कंपनी का उस पर कब्जा होना नहीं है। तकनीक का असली लक्ष्य यह है कि वह समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे और करोड़ों लोगों की जिंदगी में सुधार ला सके। उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे देश ने तकनीक को आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनाया है और इससे देश की तस्वीर बदल रही है।
डिजिटल पेमेंट में दिखती है समावेशी तकनीक की असली ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने यह साबित कर दिया है कि समावेशी तकनीक क्या होती है। आज देश के छोटे से छोटे गांवों में भी लोग फोन के जरिए लेनदेन कर रहे हैं। चाय बेचने वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर कोई डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहा है। यह इस बात का सबूत है कि तकनीक जब आम लोगों के हाथ में जाती है, तो वह कैसे क्रांति लाती है।
सरकार की नीतियों और डिजिटल इंडिया अभियान की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश में तकनीक का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। इससे न केवल पारदर्शिता आई है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी है। करोड़ों देशवासियों के बैंक खातों में सीधे पैसे पहुंचने से बिचौलियों का खेल खत्म हो चुका है। भारत का यह मॉडल आज दुनिया के कई अन्य विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणा बन गया है जो अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारना चाहते हैं।
ग्लोबल मंच पर शक्ति के संतुलन और विकास का नया रास्ता
ब्लूमबर्ग फोरम जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की यह बात रखना दुनिया को एक बड़ा संदेश देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में आज शक्ति का सही संतुलन बहुत जरूरी है। कोई भी एक देश या व्यवस्था पूरी दुनिया की दिशा तय नहीं कर सकती है। समावेशी विकास और आपसी सहयोग से ही दुनिया की सभी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। भारत ने हमेशा से ही शांति और सबका साथ, सबका विकास के रास्ते को अपनाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। जब देश का मुखिया दुनिया के सामने यह कहता है कि तकनीक और लोकतंत्र का मेल किस तरह से करोड़ों जिंदगियों को बदल रहा है, तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत होता है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसका मुख्य कारण देश का मजबूत लोकतंत्र और तकनीक का सही इस्तेमाल है।
भविष्य की नीतियां और डिजिटल बदलाव की दिशा
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल और रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक बनाने और दुनिया को रास्ता दिखाने वाला देश बन चुका है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य नई तकनीकों में भी भारत अहम भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि देश का युवा इन तकनीकों का इस्तेमाल करके नए रोजगार पैदा करे और देश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाए।
प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी बात पूरी मजबूती से रख रहा है। चाहे डिजिटल पेमेंट हो या फिर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना, भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि सही नीतियां क्या होती हैं। आने वाले दिनों में इन बियों का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति पर भी साफ तौर पर देखने को मिलेगा।







