नई दिल्ली के राजघाट पर आयोजित एक कार्यक्रम और प्रदर्शन के बाद देश की राजनीति में अचानक गर्माहट आ गई है। यह पूरा मामला सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी की तरफ से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। अभिनेता प्रकाश राज ने इस प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामने का बचाव किया है। उनका कहना है कि देश में तिरंगा उठाना कोई गुनाह नहीं है और इस पर सवाल उठाने वाले लोग गलत सोच रखते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग तेज हो गई है और पक्ष-विपक्ष के नेता आमने-सामने आ गए हैं।
अभिनेता प्रकाश राज ने सीजेपी के मंच से अपनी बात रखते हुए कहा कि उन पर और उनके साथियों पर जो भी सवाल उठाए जा रहे हैं वे निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के लोगों ने इस पूरे मामले को लेकर माहौल खराब करने की कोशिश की है। प्रकाश राज ने जोर देकर कहा कि वे हमेशा से देश के संविधान और मूल्यों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजघाट जैसी पवित्र जगह पर जाकर अपनी बात कहना और तिरंगा हाथ में लेना किसी भी तरह से देशद्रोह या गलत काम नहीं हो सकता है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी बहस को पूरी तरह से हवा दे दी है और लोग इस पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं।
किरेन रिजिजू का तीखा हमला और राष्ट्रवाद पर बहस
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद सख्त रुख अपनाया है और अभिनेता प्रकाश राज पर तीखा हमला बोला है। किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से कहा कि देश की लड़ाई साफ तौर पर भारत-विरोधी ताकतों और देशप्रेमियों के बीच चल रही है। उन्होंने बिना नाम लिए या सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश के खिलाफ खड़े होने वाले तत्वों का समर्थन करते हैं, वे असलियत में देश के दुश्मन हैं। रिजिजू ने कड़े शब्दों में कहा कि देश की जनता सब देख रही है और वह जानती है कि कौन सच के साथ है और कौन सिर्फ राजनीति कर रहा है। मंत्री के इस बयान के बाद से सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं में भी भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कुछ लोग जानबूझकर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदों के लिए करना और फिर खुद को पीड़ित बताना अब एक पुराना हथकंडा बन चुका है। रिजिजू के इस पलटवार के बाद से यह विवाद और ज्यादा गहरा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है क्योंकि दोनों तरफ से तीखे बयानों का दौर लगातार जारी है। पुलिस और प्रशासन भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि शहर में कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में रहे।
सीजेपी का विरोध प्रदर्शन और जमीनी हालात
राजघाट पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में देश के कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी भी शामिल हुए थे। सीजेपी के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालातों पर अपनी आवाज बुलंद करना था। आयोजकों का कहना था कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पुलिस बल को बड़ी संख्या में राजघाट के आसपास तैनात किया गया था ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां कुछ लोग प्रकाश राज के समर्थन में उतर आए हैं और कह रहे हैं कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताना सबका हक है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के तर्कों का समर्थन कर रहा है। लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान हर नागरिक का पहला कर्तव्य होना चाहिए और इस पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स आप तक पहुंचाती रहेगी।








