370 रुपये की बिरयानी और एक कॉमेडी शो का विवाद
देशभर में इन दिनों स्टैंड-अप कॉमेडी और उसमें इस्तेमाल होने वाले कंटेंट को लेकर लगातार बहस छिड़ी रहती है। ऐसा ही एक ताजा मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे ने 370 रुपये की बिरयानी को लेकर खड़े हुए एक बड़े विवाद के बाद कानूनी राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मोरे की मुख्य मांग यह है कि उनके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को एक साथ मिला दिया जाए, ताकि उन्हें बार-बार अलग-अलग जगहों पर कानूनी प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े।
यह पूरा मामला कुछ समय पहले गुरुग्राम में हुए एक लाइव कॉमेडी शो से जुड़ा हुआ है। इस शो के दौरान मंच पर जो बातचीत हुई, उसने बाद में सोशल मीडिया पर एक तूल पकड़ लिया और देखते ही देखते यह एक बड़ा कानूनी विवाद बन गया। इस मामले में न केवल सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, बल्कि कानून के रखवाले भी सक्रिय हो गए और कई जगह पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गईं।
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आखिर क्या था गुरुग्राम शो का पूरा वाकया?
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम में आयोजित एक कॉमेडी शो के दौरान प्रणीत मोरे अपने दर्शकों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान हिमांशु जांगड़ा नाम के एक दर्शक ने मंच पर आकर एक महिला के साथ अपनी डेट का जिक्र किया और एक विवादित बयान दिया। दर्शक ने कहा था कि उसने अपनी डेट के दौरान 370 रुपये चिकन बिरयानी पर खर्च किए थे और उसे पूरी उम्मीद थी कि इसके बदले महिला उसके साथ शारीरिक संबंध बनाएगी।
इस टिप्पणी के बाद मंच पर मौजूद कॉमेडियन प्रणीत मोरे ने इस पर हंसते हुए इसे 'पीक गुरुग्राम कंटेंट' करार दिया था। हालांकि, उस समय शायद किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह हल्की-फुल्की हंसी-मजाक वाली बात एक दिन देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच जाएगी। जब इस शो का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, तो लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सहमति (consent) जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को हल्के में लेने के लिए कॉमेडियन और दर्शक दोनों की जमकर आलोचना की.
सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना और सार्वजनिक माफी
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, नेटिज़न्स ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। लोगों का कहना था कि इस तरह के बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है और यह महिलाओं के प्रति अपमानजनक है। बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं को देखते हुए प्रणीत मोरे ने स्थिति की नजाकत को समझा और सार्वजनिक तौर पर अपनी इस टिप्पणी के लिए माफी भी मांग ली।
लेकिन माफी मांगने के बाद भी यह मामला थमा नहीं। वीडियो के वायरल होने के बाद साइबर स्पेस में इसकी गूंज इतनी तेज हो गई कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस पर स्वतः संज्ञान लेना पड़ा। ऑनलाइन मंचों पर अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने वाले नियमों के तहत कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी, जिसके बाद इस मामले में कानूनी शिकंजा कसता चला गया।
विभिन्न राज्यों में दर्ज हुई एफआईआर
विवाद बढ़ने के बाद सबसे पहले महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। पुलिस ने प्रणीत मोरे, दर्शक हिमांशु जांगड़ा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक तथा अश्लील ऑनलाइन सामग्री के प्रसार को लेकर आधिकारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया। महाराष्ट्र में मामला दर्ज होने के बाद इस विवाद की आंच दूसरे राज्यों तक भी पहुंच गई।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा इस मामले में संज्ञान लेकर शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर हरियाणा के गुरुग्राम में भी एक अलग से एफआईआर दर्ज कर ली गई। इस तरह से एक ही वीडियो और एक ही घटना को लेकर देश के दो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज हो गए, जिससे कॉमेडियन की मुश्किलें काफी बढ़ गईं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोले प्रणीत मोरे के वकील?
इन सभी कानूनी अड़चनों से घिरे प्रणीत मोरे ने अंततः सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने सुनवाई के दौरान मोरे के वकील ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि एक ही घटना और एक ही विवाद से जुड़े मामलों के लिए उनके मु मुवक्किल को देश के अलग-अलग राज्यों में कई आपराधिक कार्यवाहियों का सामना करना पड़ रहा है, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।
"विवादित वीडियो उनकी अनुमति के बिना उनकी पीआर टीम द्वारा अपलोड किया गया था। वह कानून का सामना करने और ट्रायल का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़ दिया जाना चाहिए ताकि अनावश्यक उत्पीड़न से बचा जा सके।" — प्रणीत मोरे के वकील, सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कानूनी राह
प्रणीत मोरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारों को आधिकारिक रूप से नोटिस जारी किया है। अब इन सभी संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह मामला एक बार फिर से इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर बोली गई हर बात और अपलोड किया गया हर वीडियो कितनी दूरगामी कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है। स्टैंड-अप कॉमेडी के दायरे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की सीमा रेखा पर यह मामला आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण कानूनी बहस को जन्म दे सकता है, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।





