दिल्ली के एक निजी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के तीखे तेवर
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने देश की राजनीतिक और धार्मिक संस्कृति को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 'प्रतिदिन मीडिया नेटवर्क' के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कार्यशैली और वैचारिक प्राथमिकताओं पर खुला हमला बोला। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं में अलग-अलग आस्थाएं शामिल हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए इनमें से चुनिंदा प्रतीकों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अपने संबोधन में रेवंत रेड्डी ने अपनी द्रविड़ पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी अपनी अनूठी परंपराएं और गहरी मान्यताएं हैं जो सदियों से इस देश की मिट्टी से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक राजनीतिक दल द्वारा आस्था के केंद्रों को अपनी राजनीतिक विचारधारा के दायरे में कैद कर लेना लोकतांत्रिक ताने-बाने के अनुकूल नहीं है। उनके इस बयान के बाद से राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर धर्म और राजनीति के अंतःसंबंधों पर बहस छिड़ गई है।
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'बीजेपी ने भगवान राम को बना लिया है राजनीतिक हथियार'
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने भाषण में सबसे कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बीजेपी ने भगवान राम को एक राजनीतिक प्रतीक के रूप में हथिया लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम इस देश के कोने-कोने में लोगों की आस्था और आंतरिक भावनाओं से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें एक दल विशेष की राजनीतिक बपौती की तरह पेश किया जा रहा है। रेवंत रेड्डी के अनुसार, जब आस्था को राजनीतिक हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, तो समाज में सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ने लगता है।
उन्होंने सवालिया लहजे में यह भी पूछा कि राजनीतिक मंचों पर केवल एक ही विशेष नारे पर जोर क्यों दिया जाता है। रेवंत रेड्डी ने तंज कसते हुए कहा कि क्या आपने कभी देश के इन नेताओं को किसी बड़े सार्वजनिक मंच पर 'हर हर महादेव' का उद्घोष करते हुए देखा है? उन्होंने कहा कि जब गैर-बीजेपी शासित राज्यों के नेता या अन्य संस्कृतियों के लोग भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हैं, तो उसे एक खास चश्मे से देखा जाता है।
अमीरों और गरीबों के देवताओं के बीच तुलना पर सियासी उबाल
धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक वर्गों की तुलना करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने एक और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में भगवान शिव को हमेशा से आम जनता, वंचितों और गरीबों का देवता माना जाता रहा है, जबकि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भगवान राम के नाम पर जिस तरह की कॉरपोरेट शैली की राजनीति हो रही है, वह एक वर्ग विशेष को ध्यान में रखकर की जाती है।
रेवंत रेड्डी ने बिना लाग-लपेट के कहा कि बीजेपी असल में संभ्रांत वर्ग और अमीरों की पार्टी है और उनकी पूरी राजनीतिक रणनीति इसी ढांचे पर काम करती है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि उनकी राजनीतिक शब्दावली और धार्मिक नारे भी आम आदमी की मूल भावनाओं के बजाय सत्ता के समीकरण साधने के लिए गढ़े जाते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मोर्चे पर बीजेपी को घेरने की एक नई रणनीति पर काम कर रही है।
केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार का तीखा पलटवार
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इस तीखे बयान के तुरंत बाद बीजेपी की ओर से भी जोरदार प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कड़ा प्रहार करते हुए रेवंत रेड्डी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि जो नेता पहले 'मुसलमान कांग्रेस है, कांग्रेस मुसलमान है' जैसे बयान देकर राजनीति कर चुके हैं, वे अब भगवान राम और भगवान शिव के बीच कृत्रिम दीवारें खड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में आगे कहा कि तेलंगाना जैसे राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को, जिसके अधिकार क्षेत्र में वेमुलावाड़ा स्थित 'दक्षिण काशी' और भद्राचलम स्थित 'दक्षिण अयोध्या' जैसे पवित्र तीर्थ स्थल आते हैं, धर्म के नाम पर उत्तर और दक्षिण की राजनीति करने से बचना चाहिए। बंडी संजय कुमार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख अब इस तरह के विभाजनकारी बयानों का सहारा ले रहे हैं।
सांस्कृतिक राजनीति और आगामी चुनावी रण
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक प्रतीकों और धार्मिक अस्मिता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान चरम पर है। कांग्रेस पार्टी लगातार यह रणनीति बना रही है कि वह सॉफ्ट हिंदुत्व या अपनी क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान के जरिए बीजेपी के आक्रामक हिंदुत्व एजेंडे का मुकाबला करे। रेवंत रेड्डी का यह बयान उसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस तरह के बयान दक्षिण भारत के राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सियासी पारा और बढ़ाएंगे। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अपने-अपने वोट बैंक को एकजुट करने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की नई व्याख्या पेश करने में जुटे हैं, जिससे जनता के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण और गहरा होता जा रहा है।
"तेलंगाना के मुख्यमंत्री होने के नाते रेवंत रेड्डी को भगवान राम और भगवान शिव को उत्तर और दक्षिण में बांटने से बचना चाहिए। वेमुलावाड़ा और भद्राचलम जैसे पवित्र स्थल हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं, जिन्हें राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" — बंडी संजय कुमार, केंद्रीय राज्य मंत्री








