देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। समय-समय पर राजनीतिक दल युवाओं को अपने पाले में करने के लिए नई-नई रणनीतियां अपनाते रहते हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर छात्र संगठनों की सक्रियता तेज हो गई है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के छात्र संगठन ने युवाओं को अपने पाले में लाने और उन्हें अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने के लिए एक खास पहल की शुरुआत की है। इस मुहिम के तहत परिसरों का रुख किया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी के मतदाताओं और छात्रों के बीच सीधी पहुंच बनाई जा सके।
परिसरों में उतरी समाजवादी छात्र सभा, क्या है नई रणनीति?
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षिक केंद्रों में शुमार प्रयागराज के एक जाने-माने कॉलेज परिसर में समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने हाल ही में जोरदार दस्तक दी। यहां उन्होंने 'छात्र नौजवान पीडीए जागरूकता अभियान' का संचालन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिसरों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तक अपनी बात पहुंचाना और उन्हें मौजूदा दौर के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों से अवगत कराना था। कार्यकर्ताओं ने कॉलेज के अलग-अलग विभागों और कक्षाओं के बाहर जाकर युवाओं से संवाद स्थापित किया।
इस अभियान के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं के हाथ में पर्चे और अपील पत्र थे, जिन्हें छात्रों के बीच बड़े पैमाने पर बांटा गया। इन पर्चों के माध्यम से युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि देश और प्रदेश की मौजूदा परिस्थितियों में उनके अधिकार कितने सुरक्षित हैं और उन्हें अपने हक की लड़ाई के लिए किस प्रकार आगे आना चाहिए। संगठन से जुड़े लोगों का मानना है कि जब तक युवा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक समाज में वास्तविक बदलाव की कल्पना नहीं की जा सकती है।
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शिक्षा, रोजगार और हक़ के मुद्दों पर सीधा संवाद
आज के दौर में देश के युवाओं के सामने सबसे बड़े संकट शिक्षा की स्थिति और रोजगार के अवसरों को लेकर हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए छात्र सभा के इस अभियान में मुख्य रूप से बेरोजगारी, महंगी होती उच्च शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े अन्य गंभीर विषयों को उठाया गया। कार्यकर्ताओं ने परिसरों में छात्रों के साथ छोटी-छोटी बैठकें कीं और उनसे संवाद स्थापित किया कि कैसे आज का युवा नीतिगत फैसलों से प्रभावित हो रहा है।
बातचीत के दौरान छात्रों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार सरकारी नीतियों के कारण रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और छात्रों को अपनी आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि युवा आज अपने भविष्य को लेकर गंभीर नहीं हुए, तो आने वाले समय में उनकी राह और अधिक कठिन हो जाएगी। इसलिए यह जरूरी है कि वे एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग करें और व्यवस्था पर सवाल खड़े करें।
"युवाओं की आवाज को दबाया जा रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। इस मुहिम के जरिए हम हर छात्र तक पहुंचकर उन्हें उनके हक की लड़ाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं ताकि आने वाले दिनों में एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सके।" — स्थानीय छात्र नेता, समाजवादी छात्र सभा
पीडीए फॉर्मूले के जरिए छात्रों को जोड़ने की कवायद
समाजवादी पार्टी इन दिनों अपनी राजनीति को धार देने के लिए पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के समीकरण पर सबसे अधिक जोर दे रही है। इसी कड़ी को अब विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के परिसरों तक भी ले जाया जा रहा है। छात्र सभा द्वारा चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य भी इसी वैचारिक पृष्ठभूमि को युवाओं के बीच स्थापित करना है। पार्टी का मानना है कि यदि नई पीढ़ी इस वैचारिक पक्ष से जुड़ती है, तो इसका दूरगामी राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि समाज के दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों के युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। जब तक हर वर्ग के छात्र को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक सामाजिक न्याय का सपना अधूरा ही रहेगा। युवाओं को यह भी समझाया गया कि वे जाति, धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने बुनियादी विकास के मुद्दों पर एकजुट हों।
छात्रों की प्रतिक्रिया और आगे की क्या है योजना
इस जागरूकता अभियान को लेकर परिसरों में मिले-जुले रुझान देखने को मिले। कई छात्रों ने इस पहल की सराहना की और इसे आज के समय की जरूरत बताया, वहीं कुछ छात्र इससे पूरी तरह उदासीन भी नजर आए। हालांकि, आयोजकों का दावा है कि उन्हें बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिल रहा है और छात्र उनके इस वैचारिक अभियान से जुड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।
संगठन की ओर से यह भी घोषणा की गई है कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों और बड़े शिक्षण संस्थानों तक भी इसका विस्तार किया जाएगा। विश्वविद्यालयों के हॉस्टल से लेकर मैदानी इलाकों तक छात्रों के बीच संवाद यात्राएं निकाली जाएंगी। देखना यह होगा कि युवाओं को जोड़ने की यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखा पाती है।






