रियाद/नई दिल्ली: द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया का प्रभावशाली देश सऊदी अरब इन दिनों कई बड़े और दूरगामी फैसलों के कारण वैश्विक सुर्खियों में बना हुआ है। इतिहास और आधुनिक भू-राजनीति के चौराहे पर खड़ा यह देश एक ओर जहां अपने आंतरिक सामाजिक सुधारों और राष्ट्रीय उत्सवों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर उसे गंभीर बाहरी सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर कड़े कदम
राजधानी रियाद से हमारे फील्ड इनपुट बताते हैं कि सऊदी प्रशासन ने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक कड़ा कदम उठाया है। देश के शिक्षा तंत्र में बड़ा बदलाव करते हुए स्कूल कैंटीनों में लगभग 30 खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस सूची में चिप्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और कोल्ड टी जैसी चीजें शामिल हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी के बीच मोटापे और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार का यह कदम देश के विजन 2030 के तहत एक स्वस्थ नागरिक समाज के निर्माण की दिशा में देखा जा रहा है। इसके साथ ही, साम्राज्य में 'राष्ट्रीय दिवस' (National Day) के अवसर पर एक भव्य सार्वजनिक अवकाश की घोषणा भी की गई है, जिससे देश भर में उत्सव का माहौल है।
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क्षेत्रीय सुरक्षा और ड्रोन हमलों की चुनौती
इन आंतरिक सुधारों के बीच, सऊदी अरब की सीमाओं पर सुरक्षा हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा दागे गए ड्रोन्स को सऊदी रक्षा प्रणालियों द्वारा सफलतापूर्वक बेअसर (neutralize) किए जाने के दावे सामने आए हैं। हालांकि, इन लगातार हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।
- ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा सऊदी अरब की ओर लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।
- साम्राज्य की वायु रक्षा प्रणाली ने कई हमलों को नाकाम करने का दावा किया है।
- इन नए हमलों से रणनीतिक जहाजरानी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है।
एक वरिष्ठ भू-राजनीतिक विश्लेषक के रूप में, हमारी पड़ताल यह दर्शाती है कि सऊदी अरब एक तरफ जहां अपनी ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक नीतियों के बीच संतुलन बिठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपनी आर्थिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कूटनीतिक और सैन्य उपाय करने पड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के ये घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।







