लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक, आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारी के अनुसार, पार्टी के भीतर असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि लगभग 70 प्रतिशत विधायक पार्टी का साथ छोड़कर नए राजनीतिक समीकरण तलाश सकते हैं।
राजभर के फैसलों से विधायकों में असंतोष
पिछले कुछ महीनों में ओमप्रकाश राजभर के बार-बार बदलते राजनीतिक रुख और बयानों ने उनकी ही पार्टी के भीतर उथल-पुथल मचा दी है। ग्राउंड जीरो पर हमारी पड़ताल बताती है कि पार्टी के अधिकांश विधायक चुनावी रणनीति और टिकट वितरण को लेकर नेतृत्व के फैसलों से असहमत हैं। विधायकों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि पार्टी का वर्तमान नेतृत्व कैडर की जमीनी प्राथमिकताओं की अनदेखी कर रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी निराशा का माहौल है।
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गठबंधन की राजनीति और भविष्य का संकट
सुभासपा ने हाल के वर्षों में कई राजनीतिक पाला बदले हैं। कभी बीजेपी के साथ तो कभी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने वाले राजभर की इस अवसरवादी राजनीति से अब उनके अपने ही जनप्रतिनिधि दूरी बनाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टूट हकीकत में बदलती है, तो पूर्वांचल के बेल्ट में सुभासपा का वजूद संकट में पड़ सकता है, जहां राजभर मतदाताओं का एक अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है।
बंद कमरे की बैठकों और वार्ताओं का दौर
राजधानी लखनऊ से लेकर वाराणसी और गाजीपुर तक, सुभासपा के असंतुष्ट विधायकों की गुप्त बैठकों का दौर जारी है। हमारी खुफिया ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि इनमें से कई विधायक सत्ताधारी दल या अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों के संपर्क में हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी तक किसी ने पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले सुभासपा में एक बड़ा भूचाल आ सकता है।
पूर्वांचल की सियासत पर पड़ेगा सीधा असर
सुभासपा के भीतर इस संभावित बगावत का सीधा असर पूर्वांचल की सीटों पर पड़ेगा। ओमप्रकाश राजभर को एक जुझारू और मुखर नेता माना जाता है, लेकिन अगर उनके अपने ही विधायक उनका साथ छोड़ जाते हैं, तो चुनावी मैदान में उनकी स्थिति बेहद कमजोर हो जाएगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में इस टूट के पीछे के असली चेहरों और कारणों का और अधिक खुलासा करेगा।








