भारतीय शेयर बाजार में अचानक आया भूचाल, सेंसेक्स और निफ्टी हुए धड़ाम
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज का दिन बेहद निराशाजनक साबित हुआ। सप्ताह के शुरुआती कारोबार में आई सुस्ती के बाद दोपहर ढलते-ढलते बाजार में ऐसा भूचाल आया कि दोनों प्रमुख सूचकांक बुरी तरह बिखर गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 950 अंक से अधिक का गोता लगाकर नीचे आ गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300 से ज्यादा अंक टूट गया। इस अचानक आई भारी बिकवाली के चलते दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की गाढ़ी कमाई कुछ ही घंटों में साफ हो गई।
कारोबार की शुरुआत में बाजार का रुख सामान्य लग रहा था, लेकिन दोपहर एक बजते ही बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि बाजार संभल नहीं पाया। ऑटो, मेटल और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। जानकारों का कहना है कि बाजार में इस तरह की तेज गिरावट ने छोटे निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार बाजार पर दबाव बना हुआ था।
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सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों में भारी गिरावट, निवेशकों को लगा तगड़ा झटका
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 72,480 की तुलना में मामूली गिरावट के साथ खुला था। शुरुआती घंटों में इसमें थोड़ा उतार-चढ़ाव जरूर दिखा, लेकिन दोपहर के सत्र में यह तेजी से फिसलते हुए 71,527 के निचले स्तर पर जा पहुंचा। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में सेंसेक्स में 950 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई।
ठीक इसी तरह, एनएसई का निफ्टी भी मंदी की चपेट में आ गया। 50 शेयरों वाला यह सूचकांक अपने पिछले बंद 22,620 के मुकाबले कमजोर होकर खुला और कारोबार के दौरान फिसलते हुए 22,301 के स्तर पर आ गया। निफ्टी के इस अहम स्तर को तोड़ने से तकनीकी रूप से भी बाजार में कमजोरी का संकेत मिला है, जिससे निवेशकों का मनोबल और डगमगा गया है।
टाटा, महिंद्रा और मारुति जैसे दिग्गज शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे
इस मंदी के दौर में देश की नामचीन कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। लार्जकैप कैटेगरी में मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, आईटीसी, अदानी पोर्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे दिग्गज शेयर भारी नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए। ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा तीन फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वाहन निर्माताओं के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया।
केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दौर जोरों पर रहा। पॉलिसी बाजार, यूपीएल, भारत फोर्ज और एयू बैंक जैसे शेयर भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब चौतरफा बिकवाली होती है, तो अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर भी इस मंदी के असर से खुद को बचा नहीं पाते हैं।
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बनी मुख्य वजह
शेयर बाजार में आई इस भारी तबाही के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे अहम वजह विदेशी निवेशकों (FPI) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है। पिछले कई सत्रों से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। अकेले सितंबर महीने में ही हजारों करोड़ रुपये का आउटफ्लो देखने को मिल चुका है, जिसने बाजार की कमर तोड़ दी है।
इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। घरेलू स्तर पर प्राइमरी मार्केट में आईपीओ की बहार के कारण भी सेकेंडरी मार्केट से लिक्विडिटी खिंच रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में आई कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता को और गहरा कर दिया है।
बाजार विशेषज्ञों की निवेशकों को सलाह, घबराहट में न उठाएं कोई कदम
इस तरह की भारी उठापटक के बीच वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को संयम बरतने की सलाह दी है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं और विदेशी फंड्स की निकासी के चलते बाजार में अभी कुछ और दिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के बजाय लॉन्ग-टर्म निवेश पर ध्यान देना चाहिए।
"शेयर बाजार में जब भी इस तरह की बड़ी गिरावट आती है, तो निवेशकों को पैनिक होने से बचना चाहिए। अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और किसी भी फैसले से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।" — वरिष्ठ बाजार विश्लेषक
कुल मिलाकर, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार की चाल ग्लोबल संकेतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी हुई है, इसलिए हर एक कदम बहुत सोच-समझकर उठाने की आवश्यकता है।








