चार साल पुराने खौफनाक राज से उठा पर्दा
गुजरात के सूरत जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। अपराध की दुनिया में शातिर अपराधियों द्वारा छुपाए गए राज अक्सर समय के साथ सामने आ ही जाते हैं, और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और सूरत की कोसंबा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे खौफनाक ट्रिपल मर्डर केस का पर्दाफाश किया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। आज से करीब चार साल पहले कोरोना काल के दौरान कोसंबा में एक 70 वर्षीय वृद्धा सहित तीन महिलाओं की निर्मम हत्या कर दी गई थी। हैरानी की बात यह है कि इन हत्याओं को किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि घर के ही अपनों ने अंजाम दिया था।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मुख्य आरोपी ने अपनी ही पत्नी को कानूनी शिकंजे में फंसाने के लिए पुलिस के सामने एक झूठी कहानी गढ़ी। आरोपी पति को यह अंदाजा भी नहीं था कि उसकी यह चाल उसी पर भारी पड़ जाएगी और पुलिस की गहन तफ्तीश में उसकी अपनी करतूतों का कच्चा चिट्ठा खुलकर सामने आ जाएगा। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर जब्द किए गए स्थान पर खुदाई करवाई, तो वहां से इंसानी कंकाल और अवशेष बरामद हुए, जिसके बाद इस भयानक अपराध की परतें एक-एक करके उतरती चली गईं।
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ऐसे रची गई थी बुजुर्ग महिला की हत्या की साजिश
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, यह पूरी घटना साल 2022 के अक्टूबर महीने की है। कोसंबा के वडफलिया इलाके में 70 वर्षीय शांताबेन वसावा नाम की बुजुर्ग महिला अपने घर पर अकेली रहती थीं। उनके दामाद माधवदास और उसकी पत्नी उर्मिला ने किसी रंजिश के चलते बुजुर्ग महिला को रास्ते से हटाने की खौफनाक योजना बनाई। एक रात जब शांताबेन गहरी नींद में सो रही थीं, तब इस दंपती ने बेहद शातिर तरीके से उनका तकिए से मुंह दबाकर दम घुटवा दिया। हत्या के बाद दोनों ने मिलकर शव को ठिकाने लगाने का ऐसा खौफनाक प्लान बनाया, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी पति-पत्नी वहां से फरार हो गए और गुजरात के ही धोलका तालुका के वालथेरा गांव में जाकर रहने लगे। चूंकि यह दौर कोरोना काल के ठीक बाद का था, इसलिए उन्होंने इस बात का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने आसपास के लोगों और रिश्तेदारों को यह कहकर भ्रमित कर दिया कि वृद्धा की मौत बीमारी के चलते अस्पताल में हो गई थी और उनका अंतिम संस्कार भी वहीं कर दिया गया है। किसी को भी उनके ऊपर शक नहीं हुआ और मामला ठंडे बस्ते में चला गया.
ड्रम में सीमेंट भरकर घर के आंगन में दफनाए थे शव
हत्या के बाद सबूतों को मिटाने के लिए इस शातिर दंपती ने जो किया, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। आरोपी माधवदास और उर्मिला ने शांताबेन के शव को पहले एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में डाला। इसके बाद उस ड्रम में तीन बोरी सीमेंट और पानी भरकर उसे पूरी तरह सील कर दिया ताकि किसी भी तरह की दुर्गंध बाहर न आ सके और कोई राज न खुले। कुछ महीनों तक शव को घर के अंदर ही छिपाए रखने के बाद, जब उन्हें सही मौका मिला तो उन्होंने घर के पीछे बने बाड़े और आंगन में एक गहरा गड्ढा खोदा।
इस गड्ढे में उस सीमेंट से भरे ड्रम को उतारकर दफना दिया गया। इतना ही नहीं, सबूतों को पूरी तरह दफनाने के लिए उन्होंने उस गड्ढे के ऊपर सीमेंट की एक मोटी परत यानी पक्का स्लैब जैसा बना दिया था, ताकि ऊपर से देखने पर किसी को भी जमीन की खुदाई का जरा सा भी अंदेशा न हो सके। चार साल तक यह राज पूरी तरह जमीन के नीचे दफन रहा और किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी।
घरेलू विवाद और पत्नी से बदला लेने की चाहत ने खोला राज
यह सनसनीखेज मामला तब उजागर हुआ जब आरोपी पति-पत्नी के आपसी संबंधों में खटास आ गई। पिछले करीब नौ महीनों से उर्मिला और माधवदास अलग-अलग रह रहे थे। विवाद इस बात को लेकर बढ़ गया था कि उर्मिला घर में रखे हुए तमाम कीमती गहने, नकदी और अपने बेटे को साथ लेकर पति से अलग हो गई थी। इस बात से बौखलाए माधवदास ने अपनी पत्नी से बदला लेने और उसे तथा उसके एक करीबी रिश्तेदार को झूठे केस में फंसाने की एक खतरनाक साजिश रची।
माधवदास खुद चलकर अहमदाबाद पुलिस के पास पहुंचा और यह सनसनीखेज आरोप लगाया कि उसकी पत्नी उर्मिला और उसके एक रिश्तेदार ने मिलकर नानी शांताबेन की हत्या की है और शव को घर में छिपाया है। उसे लगा कि पुलिस उसकी पत्नी को गिरफ्तार करवा देगी और उसका बदला पूरा हो जाएगा। लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि पुलिस इस आवेदन की तह तक जाने के लिए एक गहरी और वैज्ञानिक जांच शुरू कर देगी।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और कंकाल की बरामदगी
जब अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और कोसंबा पुलिस ने माधवदास के इस आवेदन की गहन जांच शुरू की, तो उसके बयानों में कई तरह के विरोधाभास और झोल नजर आए। पुलिस का शक तुरंत आवेदक यानी माधवदास की तरफ घूम गया। जब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ शुरू की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ के जाल को नहीं बचा सका और उसने आखिरकार सच उगल दिया। माधवदास ने स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर ही नानी शांताबेन की हत्या की थी।
पुलिस टीमों ने आरोपी दंपती को साथ लिया और कोसंबा स्थित उस पुराने मकान पर पहुंची। वहां गैंती और फावड़े की मदद से उस जगह की खुदाई शुरू की गई जहां सीमेंट की मोटी परत बिछाई गई थी। लगभग 4 से 5 फीट नीचे खुदाई करने के बाद पुलिस को वह ड्रम और उसके अवशेष मिल गए। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर मानव कंकाल, खोपड़ी, हड्डियां और बाल अपने कब्जे में ले लिए। कपड़ों और चूड़ियों के अवशेषों के आधार पर परिजनों ने इनकी शिनाख्त शांताबेन के रूप में की।
"आरोपी पति ने अपनी पत्नी को कानून के फंदे में फंसाने के लिए यह झूठी कहानी रची थी, ताकि वह अकेले में अपनी जिद पूरी कर सके। लेकिन हमारी साइबर और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने जब तकनीकी और जमीनी साक्ष्यों को खंगाला, तो पूरी साजिश बेनकाब हो गई। पूछताछ में आरोपी ने न केवल इस बुजुर्ग महिला की हत्या बल्कि अन्य दो महिलाओं की हत्या की बात भी कबूल की है, जिसकी विस्तृत जांच जारी है।" — भरत पटेल, पुलिस अधीक्षक, क्राइम ब्रांच
ट्रिपल मर्डर केस के अन्य पहलुओं पर गहराई से चल रही है जांच
इस हाई-प्रोफाइल और खौफनाक मामले के खुलने के बाद सूरत और आसपास के इलाकों में सनसनी फैल गई है। केवल एक बुजुर्ग महिला की हत्या ही नहीं, बल्कि पूछताछ के दौरान आरोपी दंपती ने दो अन्य महिलाओं की हत्या करने की भी बात कबूल की है, जो आपस में करीबी रिश्तेदार थीं। पुलिस अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि वे अन्य दो हत्याएं कब और किन परिस्थितियों में की गई थीं। उनके शवों को कहां ठिकाना लगाया गया था, इस बारे में भी पुलिस आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है।
फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम बरामद किए गए अवशेषों का डीएनए टेस्ट करवा रही है ताकि वैज्ञानिक रूप से हर एक तथ्य की पुष्टि की जा सके। यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कानून के हाथ भले ही लंबे हों, लेकिन अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से सबूतों को क्यों न मिटा दे, सच एक न एक दिन बाहर आ ही जाता है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर इस तिहरे हत्याकांड के तमाम अनछुए पहलुओं की तह तक जाने का प्रयास कर रही है।








