दशकों पुराने दर्द का निर्णायक और कड़ा जवाब
भारतीय सुरक्षा इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज 'सर्जिकल स्ट्राइक' के गौरवशाली दस वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। ठीक एक दशक पहले, 28 और 29 सितंबर 2016 की दरमियानी रात को भारतीय सेना के पराक्रमी जवानों ने नियंत्रण रेखा (LOC) को पार कर पाकिस्तान की सरजमीं पर पल रहे खूंखार आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इस दुस्साहसिक और अचूक सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को भारत की नई और आक्रामक रक्षा नीति से रूबरू कराया था। आज जब इस ऐतिहासिक घटना को दस साल बीत चुके हैं, तो देश एक बार फिर अपने उन वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम को याद कर रहा है, जिन्होंने दुश्मन के घर में घुसकर उसे सबक सिखाया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो प्रसारण 'मन की बात' के 138वें संस्करण में इस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए देश की बदलती हुई सामरिक नीति पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उस रात हमारे सैनिकों ने जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस का परिचय दिया था, उसने पूरी वैश्विक बिरादरी को हैरान कर दिया था। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि देशवासियों द्वारा दशकों से झेले जा रहे आतंकवाद के नासूर और पीड़ा के खिलाफ एक ठोस व निर्णायक प्रतिक्रिया थी।
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आतंकवाद के खिलाफ बदली भारत की रणनीति
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो एक दौर ऐसा था जब देश की राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुंबई तक सिलसिलेवार बम धमाके आम बात हो गई थी। तेरह सितंबर 2008 को दिल्ली के विभिन्न बाजारों में हुए सीरियल ब्लास्ट हों या फिर कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई पर हुआ भयावह 26/11 का आतंकी हमला, इन घटनाओं ने देश के मानस को अंदर तक झकझोर दिया था। हर बड़े आतंकी हमले के बाद पड़ोसी मुल्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठती थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते वह मांगें अक्सर फाइलों में दबकर रह जाती थीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इसी पुराने दौर का जिक्र करते हुए देश को याद दिलाया कि कैसे पहले भारत रक्षात्मक रुख अपनाया करता था। लेकिन साल 2014 के बाद से देश की सुरक्षा नीति में बुनियादी बदलाव आया है। आज का नया भारत आतंकवाद के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति पर पूरी सख्ती से काम कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को अब केवल कूटनीति के स्तर पर नहीं, बल्कि मैदान-ए-जंग में भी मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
बालाकोट से लेकर नए ऑपरेशनों तक की गूंज
पिछले एक दशक के सफर पर नजर डालें तो भारत ने अपनी आक्रामक आतंकवाद-विरोधी नीति को कई मौकों पर साबित करके दिखाया है। सर्जिकल स्ट्राइक से शुरू हुआ यह सिलसिला बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद चलाए गए अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों तक निरंतर जारी है। इन तमाम सैन्य कदमों ने दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि यदि किसी भी आतंकी संगठन या विदेशी ताकत ने भारत की तरफ बुरी नजर उठाने की जुर्रत की, तो उसे उसकी कीमत चुकानी ही होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कार्रवाइयों ने दुश्मन देश की उस गलतफहमी को हमेशा के लिए तोड़ दिया है, जिसके तहत वह भारत में छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) को अंजाम देकर सुरक्षित बच निकलने की फिराक में रहता था। आज भारतीय सेना के पास न केवल अत्याधुनिक तकनीक और साजो-सामान है, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व का वह मजबूत समर्थन भी है जो जवानों को बिना किसी हिचकिचाहट के आर-पार की लड़ाई लड़ने की पूरी छूट देता है।
9/11 की बरसी और वैश्विक आतंकवाद पर पीड़ा
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक आतंकवाद के काले साये को भी याद किया। इस वर्ष अमेरिका में हुए खौफनाक 9/11 आतंकी हमले को भी 25 साल पूरे होने जा रहे हैं। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए उस कायराना हमले में दुनिया भर के बेकसूर लोगों के साथ-साथ बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई थी। प्रधानमंत्री ने याद किया कि साल 2014 में अपने पहले अमेरिकी दौरे के दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क जाकर इन निर्दोष पीड़ितों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
उन्होंने एक बार फिर देश के करोड़ों नागरिकों की तरफ से उन तमाम शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने उस त्रासदी में अपने परिजनों को खोया था। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और इससे निपटने के लिए पूरी दुनिया को बिना किसी दोहरे मापदंड के एकजुट होने की जरूरत है। भारत ने हमेशा से वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई की है और आगे भी वह अपनी इस प्रतिबद्धता पर पूरी दृढ़ता से कायम रहेगा।
देश की सुरक्षा और जनता का बढ़ता भरोसा
आज जब देश सर्जिकल स्ट्राइक के दशक का जश्न मना रहा है, तो आम नागरिकों में भी सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास और सम्मान कई गुना बढ़ गया है। लोग अब यह महसूस करते हैं कि देश की सीमाएं और भीतरूनी हिस्से सुरक्षित हाथों में हैं। किसी भी अप्रिय घटना या नापाक साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमारी सेनाएं चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं।
"दस वर्ष पहले 28-29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। एलओसी के उस पार जाकर हमारे वीर जवानों ने जिस तरह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की थी, वो देख दुनिया हैरान थी। सर्जिकल स्ट्राइक ने डंके की चोट पर पूरी दुनिया के सामने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया था।" — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
यह दशक इस बात का गवाह है कि भारत ने अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को किस तरह पूरी दृढ़ता से बदला है। भविष्य में भी देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले हर नापाक मंसूबे को इसी तरह नेस्तनाबूद किया जाएगा, यही इस ऐतिहासिक दिन का मुख्य संदेश है।








