चेन्नई के राजनीतिक गलियारों में इस समय सरगर्मी अपने चरम पर है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेटिव टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से राजनेता बने तमीझगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेता सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही प्रशासनिक मशीनरी को पूरी रफ्तार से दौड़ाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर दी गई औपचारिक बधाई के साथ ही, राज्य में एक नई राजनीतिक और प्रशासनिक जंग की इबारत भी लिखी जाने लगी है।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद एक्शन में मुख्यमंत्री विजय
सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपने चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। चेन्नई में आयोजित एक भव्य और राज्य-स्तरीय ‘नशा-मुक्त तमिलनाडु’ शपथ कार्यक्रम में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता सामाजिक सुधार और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालना है। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अमले को सख्त निर्देश दिए कि राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए।
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जनता के लिए बड़े आर्थिक और कल्याणकारी ऐलान
केवल प्रतीकात्मक शपथ ग्रहण तक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जनता को राहत देने के लिए सीएम विजय ने कड़े और बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। TVK सरकार ने सत्ता में आते ही जनता को बड़ी राहत देते हुए 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, राज्य के नवजात बच्चों के लिए एक बेहद अनोखी और महत्वाकांक्षी 'एक ग्राम गोल्ड रिंग स्कीम' (सोने की अंगूठी योजना) की शुरुआत की गई है।
"मुख्यमंत्री विजय द्वारा शुरू की गई एक ग्राम गोल्ड रिंग योजना महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए मां का तमिलनाडु का स्थायी निवासी होना, PICME में पंजीकरण और RCH ID होना अनिवार्य किया गया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।" - प्रशासनिक सूत्र
राज्यपाल बनाम सरकार: इतिहास में पहली बार बिना मंजूरी 10 अधिनियम अधिसूचित
इस बीच, तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार और राजभवन के बीच चल रहे शीतयुद्ध ने उस समय एक नया मोड़ ले लिया जब इतिहास में पहली बार राज्यपाल की औपचारिक मंजूरी के बिना 10 प्रमुख अधिनियमों को सीधे अधिसूचित कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक टकराव को और अधिक गहरा सकता है।
भविष्य का राजनीतिक असर और हमारी पड़ताल
- मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कार्यशैली ने पारंपरिक राजनीतिक दलों (द्रमुक और अन्नाद्रमुक) की नींद उड़ा दी है।
- मुफ्त बिजली और सामाजिक कल्याण की योजनाओं से निचले टबके के मतदाताओं में विजय की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
- राज्यपाल के साथ सीधा टकराव आने वाले दिनों में कानूनी और संवैधानिक लड़ाइयों का एक नया अध्याय खोल सकता है।
- ड्रग्स के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम से राज्य के युवाओं में एक सकारात्मक संदेश गया है।
'द फ्रीलान्स' की यह पड़ताल दर्शाती है कि तमिलनाडु की राजनीति अब एक नए, अप्रत्याशित और आक्रामक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां एक तरफ लोकलुभावन नीतियां हैं, तो दूसरी तरफ कड़े प्रशासनिक व संवैधानिक संघर्ष भी मुंह बाए खड़े हैं।








