कौन है अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और क्या है उसकी पृष्ठभूमि?
मैथ्यू वैनडाइक का जन्म साल 1981 में अमेरिका के बाल्टीमोर शहर में हुआ था। वह खुद को एक 'मर्सिनरी' यानी भाड़े का सैनिक बताता है, जो पैसों के बदले किसी भी देश, क्षेत्र या संगठन के संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए तैयार रहता है। उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक, उसने 'संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' नाम से एक प्राइवेट मिलिट्री कंपनी की स्थापना की है। इसके अलावा, वह खुद को युद्ध क्षेत्र को कवर करने वाला पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर भी बताता है। अपने दो दशक के करियर के दौरान उसने सीरिया और इराक समेत दुनिया के कई संघर्षग्रस्त इलाकों में वक्त बिताया है और युद्धबंदी भी रह चुका है।
करीब छह महीने पहले भारत की शीर्ष आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी ने उसे देश की सीमा में संदिग्ध गतिविधियों के चलते धर दबोचा था। गिरफ्तारी के वक्त उस पर और उसके साथियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की बेहद सख्त धारा 18 के तहत मामले दर्ज किए गए थे। यह कानून आतंकी साजिश रचने, उसमें मदद करने या किसी भी प्रकार का समर्थन देने जैसे गंभीर अपराधों पर लागू होता है। इस कार्रवाई के बाद से ही यह मामला सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया था।
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तिहाड़ जेल से अचानक रिहाई और चार्जशीट का बदला हुआ स्वरूप
कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, UAPA के मामलों में जांच पूरी कर तय समयसीमा के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होता है। मैथ्यू के मामले में यह अवधि समाप्त हो रही थी, जिसके चलते जांच एजेंसी ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया। हालांकि, इस बार चार्जशीट में UAPA की पुरानी गंभीर धाराओं के स्थान पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से जुड़ी धाराओं को शामिल किया गया। इन धाराओं का संबंध मुख्य रूप से बिना वैध दस्तावेजों के देश में प्रवेश करने और वीजा नियमों का उल्लंघन करने से है।
जांच एजेंसी का तर्क था कि मामले की तह तक जाने के लिए अभी और समय की आवश्यकता है, और फिलहाल विदेशी अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं। इसके बाद अदालत ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी को राहत प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप तिहाड़ जेल में बंद मैथ्यू और अन्य विदेशी नागरिकों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया। जेल से बाहर आने के तुरंत बाद वह अमेरिकी उड़ान भरकर अपने वतन लौट चुका है, लेकिन इस प्रक्रिया ने कई कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
विदेशी कूटनीतिक दबाव और राजनीतिक गलियारों में छिड़ा घमासान
इस हाई-प्रोफाइल रिहाई के सामने आते ही देश के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि यह फैसला विदेशी कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने का परिणाम है। नेताओं का दावा है कि उच्च स्तरीय बैठकों और विदेशी मेहमानों के दौरों के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया की दिशा बदल गई।
विपक्ष का यह भी कहना है कि साधारण भारतीय नागरिक कड़े कानूनों के तहत वर्षों तक अदालतों और जेलों के चक्कर काटने को मजबूर रहते हैं, जबकि विदेशी संदिग्धों को इस तरह आसानी से बाहर जाने की अनुमति मिल जाती है। दूसरी ओर, कूटनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक हितों का संतुलन साधना सरकार के लिए बेहद पेचीदा और संवेदनशील कार्य होता है।
"अगर खुद जांच एजेंसी यह मान रही है कि जांच में वक्त लगेगा और आरोपी की शारीरिक मौजूदगी अभी अनिवार्य नहीं है, तो किसी विदेशी नागरिक को सिर्फ इस आशंका पर लंबे समय तक देश में रोके रखना कानूनी रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत के पास आरोपी के यात्रा दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उसे तलब किया जा सकता है।" — सुमित नेमा, सीनियर एडवोकेट
अदालत की शर्तें और भविष्य में कानूनी कार्रवाई की राह
अदालत ने रिहाई के आदेश के साथ कुछ स्पष्ट शर्तें भी तय की हैं, जिसके तहत मैथ्यू और अन्य आरोपियों को तय समय के भीतर भारत वापस लौटना होगा और अदालत के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई विदेशी नागरिक तय समयसीमा के भीतर वापस नहीं लौटता है, तो देश की न्यायपालिका के पास जमानत रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी करने या फिर अंतरराष्ट्रीय संधियों के माध्यम से प्रत्यर्पण की मांग करने का विकल्प खुला रहता है।
फिलहाल जांच एजेंसी की ओर से मामले की आंतरिक जांच अभी बंद नहीं की गई है। यदि आने वाले दिनों में एजेंसी के हाथ पुख्ता सबूत लगते हैं और विदेशी नागरिकों के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता की पुष्टि होती है, तो एक पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। ऐसा होने पर एक बार फिर पुराने गंभीर आरोप वापस लौट सकते हैं और कानूनी शिकंजा कस सकता है, बशर्ते आरोपी कानून के दायरे में वापस आएं।







