बॉलीवुड का संगीत हमेशा से ही भावनाओं को बयां करने का एक बेहतरीन जरिया रहा है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गाने दर्ज हैं, जो रिलीज होने के इतने साल बाद भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही आइकॉनिक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी धुन और बोल आज भी सुने जाएं तो आंखें नम हो जाती हैं। इस गाने की खासियत यह है कि जब यह पहली बार स्टूडियो में रिकॉर्ड किया जा रहा था, तब इसे बनाने वाले निर्देशक खुद अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए थे।
जब पहली ही फिल्म में रच दिया गया था इतिहास
यह किस्सा है साल 2001 में रिलीज हुई रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'तुम बिन' का। इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था। खास बात यह है कि 'तुम बिन' अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने जिस तरह की कहानी और संगीत का चयन किया, उसने हिंदी सिनेमा जगत में एक नया मुकाम हासिल कर लिया। फिल्म की कहानी जितनी इमोशनल थी, उससे कहीं ज्यादा असरदार इसके गाने थे, जो आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा हैं।
फिल्म का टाइटल ट्रैक 'तुम बिन जिया जाए कैसे, कैसे जिया जाए तुम बिन' उस दौर के हर आशिक और दिल टूटे इंसान की जुबान पर चढ़ गया था। इस गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज भी जब यह रेडियो या सोशल मीडिया पर बजता है, तो लोग पुराने दौर की यादों में खो जाते हैं। गाने का संगीत और इसके बोल इतने गहरे थे कि सुनने वाले का दिल पसीज जाता था।
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स्टूडियो में क्यों रो पड़े थे निर्देशक अनुभव सिन्हा?
इस गाने को अपनी जादुई आवाज से सजाया था दक्षिण भारत की मशहूर गायिका के एस चित्रा ने। चित्रा जी की आवाज में एक ऐसा दर्द और ठहराव था, जो सीधे सुनने वाले के दिल को छू जाता था। जब इस गाने की रिकॉर्डिंग मुंबई के एक स्टूडियो में चल रही थी, उस वक्त का माहौल बेहद भावुक कर देने वाला था। के एस चित्रा जब अपनी सुरीली आवाज में इस गाने के शब्दों को पिरो रही थीं, तो स्टूडियो में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो रही थीं।
सूत्रों और खुद निर्देशक के अनुभवों के मुताबिक, जब यह गाना रिकॉर्ड हो रहा था, तो डायरेक्टर अनुभव सिन्हा अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और फूट-फूटकर रोने लगे। उनके आंसू इस बात का गवाह थे कि जो संगीत उन्होंने अपनी फिल्म के लिए सोचा था, वह उससे भी कहीं ज्यादा जीवंत और असरदार बनकर सामने आया था। चित्रा की आवाज का जादू ऐसा था कि रिकॉर्डिंग रूम में सन्नाटा पसर गया था और हर कोई उस धुन में डूब गया था.
"जब चित्रा जी ने स्टूडियो में गाना गाना शुरू किया, तो उनकी आवाज का दर्द इतना गहरा था कि मैं अपने आंसुओं को रोक नहीं सका। वह पल मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक पलों में से एक था।" — अनुभव सिन्हा, निर्देशक
कम बजट में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया था गदर
अनुभव सिन्हा की यह फिल्म केवल गानों के मामले में ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। 'तुम बिन' फिल्म को बेहद कम बजट यानी करीब 2.75 करोड़ रुपये में बनाया गया था। लेकिन जब यह सिनेमाघरों में उतरी, तो इसने दर्शकों का ऐसा दिल जीता कि बॉक्स ऑफिस पर इसने ताबड़तोड़ कमाई करते हुए करीब 4.43 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। उस दौर के हिसाब से यह कमाई बहुत बड़ी मानी जाती थी।
फिल्म की सफलता में इसके नए और फ्रेश चेहरों का भी बड़ा हाथ था। इस फिल्म के जरिए इंडस्ट्री को कई नए कलाकार मिले, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से अभिनय की छाप छोड़ी।
फिल्म के कलाकारों ने छोड़ी थी गहरी छाप
'तुम बिन' फिल्म की स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें प्रियांशु चटर्जी, संदली सिन्हा, हिमांशु मलिक, राकेश वशिष्ठ (जिन्हें अब राकेश बापट के नाम से जाना जाता है) और अमृता प्रकाश जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इन सभी कलाकारों की मासूमियत और उनकी नेचुरल एक्टिंग ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया। फिल्म की कहानी, जिसमें प्यार, त्याग, और पछतावे का मिश्रण था, आज भी लोगों को उतनी ही प्रासंगिक लगती है जितनी दो दशक पहले लगती थी।
फिल्म के गाने जैसे 'छन छन', 'कोई फरियाद', और 'तुम बिन जिया जाए कैसे' आज भी एवरग्रीन गानों की सूची में सबसे ऊपर गिने जाते हैं। जगजीत सिंह की आवाज में गाया गया 'कोई फरियाद' गाना भी आज तक लोगों के जेहन में जिंदा है।
आज भी क्यों दिलों पर राज करती है 'तुम बिन'?
आज के दौर में जहां रीमेक और तेज बीट्स वाले गानों का चलन बढ़ गया है, वहीं 26 साल पुराना 'तुम बिन' का संगीत आज भी सुकून की तलाश करने वालों को अपनी ओर खींचता है। यह इस बात का सबूत है कि जब कला और संगीत पूरी ईमानदारी के साथ बनाए जाते हैं, तो वे कालजयी बन जाते हैं। अनुभव सिन्हा की यह पहली फिल्म भले ही रोमांस और ड्रामे पर आधारित थी, लेकिन इसने बॉलीवुड को सिखा दिया कि कहानी और संगीत में अगर दम हो, तो बड़े सितारों के बिना भी इतिहास रचा जा सकता है। आज भी जब यह गाना किसी की प्लेलिस्ट में बजता है, तो वह दौर आंखों के सामने ताजा हो जाता है।






