उत्तर प्रदेश में साल 2027 के महासंग्राम की सुगबुगाहट तेज
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी भले ही अभी अपने चरम पर न दिख रही हो, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सुगबुगाहट पूरी तरह से शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन ने इस बड़े लोकतांत्रिक अनुष्ठान को निर्बाध, पारदर्शी और पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए अपनी रणनीति का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय करते हुए विभिन्न निर्वाचन कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी अनुभवी और जिम्मेदार अधिकारियों के कंधों पर डाल दी गई है।
लोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व को सफल बनाने के लिए किसी भी प्रकार की कोताही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है। यही वजह है कि मतदान की तिथि घोषित होने से काफी पहले ही तमाम छोटी-बड़ी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने का सिलसिला जोर पकड़ चुका है। जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी किए गए आदेशों के मुताबिक, चुनाव से जुड़े हर एक पहलू पर पैनी नजर रखने के लिए विशेष कक्षों और समितियों का गठन किया जा रहा है, ताकि ऐन वक्त पर किसी तरह की अफरा-तफरी का माहौल न पैदा हो सके।
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नोडल अधिकारियों के कंधों पर चुनाव संचालन की बड़ी जिम्मेदारी
चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन ने विभिन्न निर्वाचन गतिविधियों की निगरानी के वास्ते कई वरिष्ठ और सक्षम अधिकारियों को बतौर नोडल अधिकारी तैनात किया है। इन अधिकारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा तय किए गए मानकों के दायरे में रहकर ही अपनी कार्ययोजना को आगे बढ़ाएं। प्रशासनिक अमले का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि चुनाव कार्य में लगा हर एक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को लेकर पूरी तरह से सजग रहे।
इन नोडल अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों में मुख्य रूप से मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन, मतदान कर्मियों का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, चुनावी सामग्रियों का सुरक्षित रखरखाव और वितरण, तथा सुगम परिवहन व्यवस्था जैसी बुनियादी चीजें शामिल हैं। इसके अलावा कम्प्यूटरीकरण, साइबर सुरक्षा, और मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले स्वीप (SVEEP) कार्यक्रमों की कमान भी इन्हीं अधिकारियों के हाथों में सौंपी गई है, ताकि अधिक से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित हो सकें।
सुरक्षा व्यवस्था और ईवीएम प्रबंधन पर प्रशासनिक फोकस
किसी भी चुनाव की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां कानून-व्यवस्था कितनी मजबूत है और सुरक्षा के मोर्चे पर प्रशासन कितना मुस्तैद है। इसे ध्यान में रखते हुए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा योजना के लिए अलग से मजबूत नोडल तंत्र बनाया गया है। पुलिस और प्रशासनिक तालमेल के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और वहां पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के प्रबंधन को लेकर बेहद सख्त और पारदर्शी प्रोटोकॉल लागू किया गया है। ईवीएम के भंडारण, उनकी पहली और दूसरी स्तर की जांच (First Level Checking), और सुरक्षित आवाजाही को लेकर नोडल अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखने को कहा गया है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा ताकि चुनाव की शुचिता पर किसी भी प्रकार का कोई सवालिया निशान न लग सके।
व्यय निगरानी और मीडिया प्रकोष्ठ के जरिए पारदर्शिता पर जोर
लोकसभा या विधानसभा चुनाव के दौरान धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल पर लगाम लगाना चुनाव आयोग के लिए हमेशा से एक बड़ी प्राथमिकता रहा है। इसी उद्देश्य के तहत व्यय मॉनिटरिंग (Expenditure Monitoring) के लिए विशेष प्रकोष्ठ सक्रिय कर दिए गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले खर्च का पाई-पाई का हिसाब रखने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और स्टेटिक सर्विलांस टीमों को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। कौन उम्मीदवार कितना खर्च कर रहा है, इस पर हर पल पैनी नजर रखी जाएगी।
इसके अलावा मीडिया और संचार योजना के लिए भी अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो पल-पल की खबरों और आधिकारिक जानकारियों को मीडिया तक पहुंचाने के साथ-साथ फेक न्यूज या भ्रामक प्रचार पर भी कड़ी नजर रखेगा। शिकायत निवारण और मतदाता हेल्पलाइन को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि आम नागरिक अपनी किसी भी प्रकार की चुनावी शिकायत को आसानी से दर्ज करा सकें और कम से कम समय में उसका समाधान प्राप्त कर सकें।
जिलाधिकारी की दो टूक: हर हाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष होगा मतदान
जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिला प्रशासन का एकमात्र लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनावों को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराना है। उन्होंने सभी नियुक्त नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सौंपे गए कार्यों को पूरी प्रतिबद्धता और समयबद्ध तरीके से पूरा करें। विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने की हिदायत भी दी गई है ताकि किसी भी स्तर पर संवादहीनता की स्थिति न पैदा हो।
"हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में हर एक मतदाता बिना किसी डर या प्रलोभन के अपने मताधिकार का प्रयोग करे। निर्वाचन आयोग के तय मानकों का पूरी सख्ती से पालन कराया जा रहा है और सभी नोडल अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करने के निर्देश दिए गए हैं।" — जिलाधिकारी, जिला प्रशासन
कुल मिलाकर देखा जाए तो अभी भले ही चुनाव में वक्त हो, लेकिन प्रशासनिक तैयारियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि शासन और प्रशासन इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। शुरुआती चरण से ही शुरू हुई इन प्रशासनिक कवायदों से यह साफ है कि आने वाले दिनों में चुनावी सरगर्मी और अधिक तेज होने वाली है, जिससे राजनीतिक दलों की धड़कनें भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी हैं।





