उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव का बिसात बिछी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विधान परिषद (MLC) के द्विवार्षिक चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने मंगलवार को छह और नए नामों का ऐलान कर दिया, जिससे चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। इससे पहले मई के महीने में पांच सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा चुके थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तुलना में विधान परिषद का यह चुनाव काफी अलग और विशिष्ट माना जाता है। इसमें मतदाता आम जनता नहीं, बल्कि शिक्षक और स्नातक वर्ग के पढ़े-लिखे लोग होते हैं। ऐसे में साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस चुनाव को भाजपा के संगठनात्मक नेटवर्क और खास तौर पर प्रबुद्ध वर्ग के बीच अपनी पैठ परखने का एक बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
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कैडर पॉलिटिक्स को दरकिनार कर 'जिताऊ' फॉर्मूले पर जोर
इस बार के एमएलसी चुनावों में भाजपा की रणनीति में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। पार्टी ने अपने पारंपरिक कैडर की सीमाओं से बाहर निकलकर विशुद्ध रूप से 'जिताऊ' और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है, उनमें से कई ऐसे हैं जो शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे हैं या फिर अन्य दलों से नाता रखते रहे हैं। पार्टी का मुख्य उद्देश्य हर हाल में इन सीटों पर जीत दर्ज करना है, जिसके लिए मजबूत उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधान परिषद की इन सीटों पर लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों और स्थानीय शिक्षक संघों का गहरा प्रभाव रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने चुनौती केवल अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस जटिल चुनावी गणित को भेदना भी है जहां व्यक्तिगत प्रभाव और संगठन का नेटवर्क दोनों अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि पार्टी ने फूंक-फूंक कर कदम रखे हैं और हर सीट पर बेहद नपा-तुला फैसला लिया है।
ब्राह्मण चेहरों और सामाजिक समीकरणों पर खास फोकस
भाजपा ने इस बार के एमएलसी चुनावों में अपने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को पूरी मजबूती से लागू किया है। घोषित उम्मीदवारों की सूची पर गौर करें तो पार्टी ने 11 में से सबसे ज्यादा पांच सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसे राजनीतिक हलकों में एक बड़े डैमेज कंट्रोल और रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही तीन सीटों पर ओबीसी, दो सीटों पर राजपूत और एक सीट पर वैश्य वर्ग के प्रत्याशी को उतारकर हरसंभव जातिगत संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
शिक्षक निर्वाचन सीटों पर पकड़ मजबूत करने के लिए वाराणसी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खास रणनीति अपनाई गई है। पार्टी की यह कोशिश है कि प्रबुद्ध वर्ग और शिक्षकों के बीच यदि किसी प्रकार की नाराजगी या असंतोष है, तो उसे इन मजबूत चेहरों के जरिए दूर किया जाए। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदार नाथ सिंह और शिक्षक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी जैसे अनुभवी नामों पर दांव लगाकर पार्टी ने अपनी गंभीरता का संकेत दे दिया है।
शर्मा गुट में बिखराव और नए सियासी समीकरण
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियतों में से एक उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिक्षक संघों, खासतौर पर शर्मा गुट में आया बिखराव माना जा रहा है। शिक्षक राजनीति में लंबे समय से एकछत्र प्रभाव रखने वाले इस गुट के भीतर अब समीकरण बदल चुके हैं। भाजपा द्वारा कुछ प्रमुख चेहरों को अपने पाले में लाने या टिकट दिए जाने से पारंपरिक राजनीतिक गठजोड़ प्रभावित हुआ है। आगरा शिक्षक सीट से हरीकिशोर तिवारी को मैदान में उतारा जाना इसी बदली हुई राजनीतिक बबंरता का परिणाम है, जो पहले शर्मा गुट के शिक्षक संघ से जुड़े रहे हैं।
"विधान परिषद के इन चुनावों में हमारी पार्टी पूरी ताकत से उतर चुकी है। हमने हर वर्ग के हितों और योग्य उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए सूची तैयार की है, और हमें पूरा विश्वास है कि शिक्षक तथा स्नातक वर्ग का भरपूर समर्थन हमारी नीतियों को मिलेगा।" — भाजपा प्रदेश नेतृत्व
विपक्ष के लिए भी यह चुनाव अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने का एक बड़ा मौका है। समाजवादी पार्टी और अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी इन सीटों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की पूरी उम्मीद है और चुनाव परिणाम आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मतदान से लेकर मतगणना तक का पूरा शेड्यूल
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी 11 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई थी, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच का कार्य संपन्न हुआ। उम्मीदवारों के पास अपने नाम वापस लेने के लिए 9 अक्टूबर तक का समय था।
तय कार्यक्रम के तहत इन सभी 11 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इसके बाद सभी की निगाहें 27 अक्टूबर पर टिकी होंगी, जिस दिन वोटों की गिनती कर परिणामों की घोषणा की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को 31 अक्टूबर से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा, क्योंकि वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त होने जा रहा है।







