वाशिंगटन — द फ्रीलान्स की अंतरराष्ट्रीय डेस्क से प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप के उन सख्त नियमों और प्रस्तावों को खारिज कर दिया है, जिनसे नागरिकता देने के पुराने तरीकों में बदलाव की कोशिश की जा रही थी। इस फैसले से उन लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो अमेरिका में रहते हैं और जिनके बच्चे वहां पैदा होते हैं।
यह पूरा विवाद अमेरिका के संविधान के चौदहवें संशोधन से जुड़ा हुआ है। इसके तहत अमेरिका की जमीन पर पैदा होने वाले हर बच्चे को देश की नागरिकता स्वतः मिल जाती है। डोनाल्ड ट्रंप अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान इस नियम को बदलना चाहते थे। उनका तर्क था कि इससे गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले लोगों को बढ़ावा मिलता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि संविधान का यह नियम पहले की तरह ही लागू रहेगा और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर पच्चीस प्रतिशत टैक्स का बयान
इस बीच अमेरिकी राजनीति में सक्रिय डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस के व्यापारिक रिश्तों को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता है, तो अमेरिका उस पर पच्चीस प्रतिशत तक का भारी टैक्स लगा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि शायद उन्हें ऐसा कदम उठाने की जरूरत ही न पड़े। भारत सरकार ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा जरूरतें सबसे पहले आती हैं और भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही तेल आयात के फैसले लेता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत मजबूत हैं। ऐसे बयानों से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। रूस से तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता को सस्ती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भी यह कदम जरूरी माना गया है।
तिरुपति में इस्लामिक यूनिवर्सिटी को लेकर बढ़ रहा तनाव
दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर तिरुपति में एक अलग ही तरह का विवाद गहराता जा रहा है। वहां एक इस्लामिक यूनिवर्सिटी के निर्माण और स्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर उठने लगे हैं। विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस प्रोजेक्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि तिरुपति जैसे पवित्र तीर्थ स्थल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी ऐसे संस्थान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़े।
स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं। स्थानीय लोगों का एक वर्ग जहां इस शैक्षणिक संस्थान के विरोध में खुलकर सड़कों पर उतर आया है, वहीं दूसरा वर्ग इसे केवल एक शिक्षा के केंद्र के रूप में देखने की बात कह रहा है। प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है ताकि शहर की कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और घरेलू राजनीति का नया दौर
इन सभी घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीति और कूटनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। अमेरिकी अदालत का नागरिकता पर आया फैसला वहां के आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं ट्रंप के बयानों और तिरुपति के स्थानीय मुद्दों पर भी देश-दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। द फ्रीलान्स की टीम इन सभी मामलों पर जमीनी स्तर से अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और हर नए अपडेट से पाठकों को अवगत कराती रहेगी।



