हर साल जब भी मौसम करवट बदलता है, हमारे आसपास का माहौल पूरी तरह से बदल जाता है। कभी गर्मी तो कभी हल्की ठंड, कभी अचानक बारिश तो कभी उमस भरा वातावरण। इस मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच सबसे आम शिकायत जो घर-घर में सुनने को मिलती है, वह है सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस मौसमी गिरफ्त का शिकार आसानी से हो जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता रहता है कि आखिर मौसम बदलते ही शरीर की सेहत क्यों बिगड़ने लगती है और क्या वाकई ठंडी हवा या तापमान का घटना-बढ़ना ही इस जुकाम की एकमात्र वजह है?
मौसम बदलने और सर्दी-जुकाम के बीच का असली वैज्ञानिक सच
आम तौर पर यह मान लिया जाता है कि ठंडी हवा के संपर्क में आने से या मौसम बदलने भर से सर्दी-जुकाम हो जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस आम धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते हैं। एस्टर सीएमआई अस्पताल बेंगलुरु की इंटरनल मेडिसिन की सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर बृं एम एस के अनुसार, मौसमी बदलाव अपने आप में सीधे तौर पर सर्दी-जुकाम पैदा नहीं करता है। इसके पीछे असली गुनहगार विभिन्न प्रकार के वायरस होते हैं। इनमें राइनोवायरस का नाम सबसे ऊपर आता है, जो सांस की नलियों को संक्रमित करने में सबसे आगे रहता है। इसके अलावा कई अन्य श्वसन वायरस भी इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं।
जब मौसम बदलता है, तो वातावरण में तापमान और नमी का स्तर भी प्रभावित होता है। बरसात के तुरंत बाद जब तापमान में अचानक बदलाव आता है, तो बैक्टीरिया और वायरस को पनपने और जीवित रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिल जाती हैं। ये सूक्ष्म जीव हवा में या सतहों पर लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। यही वजह है कि जैसे ही वेदर चेंज होता है, अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की कतारें लंबी होने लगती हैं। झज्जर सिविल अस्पताल सहित देश के कई अन्य चिकित्सा केंद्रों की ओपीडी में इन दिनों वायरल बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है।
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बंद कमरों और हवा के बहाव का वायरस फैलाने में खेल
डॉक्टर बृं एम एस का यह भी कहना है कि मौसम बदलते ही हमारे रहन-सहन के तरीके में बड़ा बदलाव आ जाता है। ठंड या बारिश शुरू होते ही लोग बाहर खुले में घूमने के बजाय अपना ज्यादातर समय घरों के अंदर, दफ्तरों या अन्य बंद कमरों में बिताना शुरू कर देते हैं। ऐसे स्थानों पर खिड़कियां और दरवाजे अमूमन बंद रहते हैं, जिससे ताजी हवा का आवागमन रुक जाता है। जब कई लोग एक ही बंद कमरे में लंबे समय तक एक-दूसरे के करीब बैठते हैं, तो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे तक वायरस पहुंचना बेहद आसान हो जाता है।
सांस से जुड़े यह वायरस हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स यानी सूक्ष्म बूंदों, एरोसोल और दूषित सतहों के जरिए बहुत तेजी से फैलते हैं। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो उसके मुंह से निकले वायरस आसपास की हवा और वस्तुओं पर चिपक जाते हैं। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति उन सतहों को छूता है और फिर अनजाने में अपने उन्हीं हाथों को नाक या मुंह के पास ले जाता है, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इस तरह एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार या दफ्तर के लोगों को बीमार कर सकती है।
कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों पर क्यों भारी पड़ता है वेदर चेंज
मौसम के इस बदलाव का असर हर इंसान पर एक जैसा नहीं होता है। कुछ लोग इस दौरान पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं, जबकि कुछ लोग तुरंत बिस्तर पर चले जाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी का मजबूत या कमजोर होना है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उनका शरीर बाहरी रोगाणुओं और संक्रमणों से मुकाबला करने में असमर्थ होता है। ऐसे लोगों को बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल इंफेक्शन सबसे जल्दी अपनी चपेट में लेते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी अक्सर संवेदनशील होती है, इसलिए वे मौसमी बीमारियों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं। बदलते मौसम में शरीर को अंदरूनी रूप से मजबूत रखना और सही पोषण लेना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा अत्यधिक ठंड या दूषित पानी के सेवन से भी बचना चाहिए। मौसम की इस मार से बचने के लिए खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद आवश्यक हो जाता है ताकि शरीर अंदर से संक्रमण से लड़ सके।
"मौसम बदलने पर भले ही सर्दी-जुकाम हो जाता है, लेकिन मौसमी बदलाव से सीधे तौर पर सर्दी-जुकाम नहीं होता है। सर्दी-जुकाम वायरस की वजह से होता है, जिनमें राइनोवायरस और सांस से जुड़ी बीमारी फैलाने वाले कई अन्य वायरस शामिल हैं। संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।" — डॉ. बृं एम एस, सीनियर कंसलटेंट, एस्टर सीएमआई अस्पताल बेंगलुरु
मौसमी संक्रमण और जुकाम से बचाव के सरल और कारगर उपाय
चूंकि मौसमी सर्दी-जुकाम मुख्य रूप से वायरस के संपर्क में आने से फैलता है, इसलिए इससे बचने के लिए सबसे जरूरी कदम साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि हमें केवल ठंडी हवा से बचने के बजाय संक्रमण के स्रोत से दूर रहने पर ध्यान देना चाहिए। दिनभर में कई बार अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। बिना धुले हाथों से अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि यही वह रास्ता है जिससे वायरस शरीर के अंदर जाता है।
भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर जाने से बचें और यदि ऐसी जगहों पर जाना जरूरी हो तो मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। इसके अलावा घरों और कार्यालयों में हवा के आने-जाने का बेहतर इंतजाम रखें ताकि ताजी हवा का संचार बना रहे। यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति सर्दी या खांसी से पीड़ित है, तो उसके ज्यादा करीब जाने से परहेज करें। थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी अपनाकर आप बदलते मौसम में भी खुद को और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।








