चंडीगढ़ की सियासत में इन दिनों पारा अपने चरम पर है। 'द फ्रीलान्स' की जमीनी पड़ताल और हालिया अदृश्य घटनाक्रम बताते हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर हाईकोर्ट के एक कड़े फैसले ने सरकार की नींद उड़ा रखी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों पर सियासी हमले भी तेज हो गए हैं।
सीएमओ भ्रष्टाचार मामला और हाईकोर्ट का कड़ा रुख
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और 'कैश फॉर ट्रांसफर' मामले में सीबीआई जांच के आदेश देकर मान सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर आगामी दो महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करे। चुनाव से ठीक पहले आया यह न्यायिक फैसला मान सरकार के उस दावे को कटघरे में खड़ा करता है, जिसमें भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने की बात बार-बार दोहराई जाती रही है।
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कैश फॉर ट्रांसफर के आरोपों पर बढ़ती तपिश
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सरकारी महकमों में तबादलों के एवज में कथित रूप से पैसे लेने के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। अदालत द्वारा इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ महीनों से विपक्ष लगातार इस मुद्दे को हवा दे रहा था, और अब हाईकोर्ट के दखल के बाद जांच का दायरा विस्तृत होने की पूरी संभावना है। राज्य सरकार के लिए दो महीने के भीतर इस पर जवाब देना और अपनी स्थिति स्पष्ट करना एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी चुनौती बन गया है।
जुबानी जंग और 'नो पास, नो गोल' का सियासी वार
कानूनी मोर्चे पर घिरने के बावजूद, मुख्यमंत्री भगवंत मान राजनीतिक मैदान में हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने पंजाब कांग्रेस प्रमुख परगट सिंह पर कड़ा तंज कसते हुए खेल की भाषा में 'नो पास, नो गोल' का नारा दिया। मान ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सिर्फ बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि जमीन पर उनकी कोई उपयोगिता नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीबीआई जांच के आदेश आने के बाद उपजे राजनीतिक दबाव से ध्यान भटकाने के लिए आप सरकार अब आक्रामक तेवर अख्तियार कर रही है।
कल्याणकारी योजनाओं के जरिए डैमेज कंट्रोल की कोशिश
एक तरफ कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर घमासान जारी है, तो दूसरी तरफ मान सरकार जनता के बीच अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहती। हाल ही में सीएम भगवंत मान ने 'मावां-धियां सत्कार योजना' का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की हर मां और बहन इस योजना की ब्रांड एंबेसडर हैं और जब तक वे पद पर हैं, किसी भी पात्र लाभार्थी को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह जनता के बीच सरकार की छवि को सुधारने और महिला मतदाताओं को साधे रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।
भविष्य का असर और राजनीतिक समीकरण
आगामी दो महीनों में सीबीआई की रिपोर्ट क्या रुख लेगी, यह पंजाब की राजनीति की अगली दिशा तय करेगा। क्या यह जांच मान सरकार के लिए राजनीतिक आपदा साबित होगी या फिर आम आदमी पार्टी इससे पार पाने में सफल रहेगी? 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार ग्राउंड जीरो से नजर बनाए रखेगा। आगामी चुनावों के मद्देनजर यह कानूनी और सियासी घमासान पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन चुका है।








