नई दिल्ली/अहमदाबाद: आसमान की ऊंचाइयों पर सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देकर 174 यात्रियों की जिंदगी बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार अब एक बड़े राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विवाद के केंद्र में आ गए हैं। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान घटी इस घटना के तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की जहां एक तरफ जांच एजेंसियां गहराई से पड़ताल कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश में इस पर जोरदार सियासी घमासान छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की चुप्पी को लेकर तीखा हमला बोला है।
'न कोई पोस्ट, न बयान': कांग्रेस पर बीजेपी का तीखा तंज
द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम को मिले इनपुट्स के मुताबिक, देश के एक होनहार युवा पायलट द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाए गए असाधारण साहस और देश का नाम रोशन करने के बावजूद कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया न दिए जाने पर बीजेपी आक्रामक हो गई है। भाजपा प्रवक्ताओं और नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब एक भारतीय नागरिक ने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान बचाई, तब देश की सबसे पुरानी पार्टी के मुंह से सराहना का एक शब्द भी क्यों नहीं निकला। राजनीतिक गलियारों में इस 'चुप्पी' को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं और इसे राष्ट्रवाद व कूटनीतिक मामलों पर विपक्ष के रवैये से जोड़कर देखा जा रहा है।
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काशी और सोमनाथ में विशेष महापूजा, गृहनगर में गर्व का माहौल
एक तरफ जहां राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर कैप्टन स्मित मछार के गृहक्षेत्र और देश के कोने-कोने में उनकी सलामती और वीरता के लिए प्रार्थनाओं का दौर चल रहा है। उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्र काशी (वाराणसी) और गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में कैप्टन स्मित के लिए विशेष महापूजा और अनुष्ठान किए गए हैं। उनके बचपन के दोस्तों और परिवारिक जनों से जब हमारी टीम ने बातचीत की, तो उनके चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था। उनके दोस्तों का कहना है कि स्मित बचपन से ही अत्यंत साहसी और कर्तव्यनिष्ठ रहे हैं, और आज उन्होंने अपनी सूझबूझ से पूरी दुनिया में देश का मस्तक ऊंचा कर दिया है।
30 सेकंड का वह निर्णायक मोड़: टल गई एक भीषण आपदा
फ्लाइट के अंदरूनी हालातों (Inside Story) की पड़ताल करें तो यह घटना किसी रोंगटे खड़े कर देने वाली थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कैप्टन स्मित मछार उस बेहद नाजुक मोड़ पर अगले 30 सेकंड के भीतर अपनी अदम्य सूझबूझ का परिचय न देते, तो हवा में ही एक बड़ा विमान हादसा हो सकता था जिसमें 174 जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो जातीं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में न केवल विमान को क्रैश होने से बचाया, बल्कि कॉकपिट के भीतर उपजे संकट को भी बेहद पेशेवर तरीके से संभाला, जिसकी तारीफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है।
कॉकपिट में 'कुल्हाड़ी' का रहस्य और सुरक्षा एजेंसियों की जांच
इस पूरे मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब कॉकपिट के अंदर सुरक्षा और आपातकालीन प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठे। क्या इस घटना के दौरान को-पायलट (First Officer) द्वारा आपातकालीन क्रैश एक्स (Emergency Crash Axe - कुल्हाड़ी) का इस्तेमाल किया गया था? इस एंगल के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) जैसी शीर्ष नियामक एजेंसियां हरकत में आ गई हैं। वे फ्लाईदुबई की इस उड़ान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहन समीक्षा कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस उड़ान के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
निष्कर्ष और आगे की राह
कैप्टन स्मित मछार की यह गाथा एक तरफ जहां भारतीय युवाओं के अदम्य साहस और पेशेवर दक्षता का प्रतीक बन चुकी है, वहीं दूसरी तरफ यह अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सुरक्षा मानकों और भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को भी उजागर करती है। जैसे-जैसे जांच एजेंसियां कॉकपिट कांड की परते उधेड़ रही हैं, आने वाले दिनों में उड्डयन सुरक्षा को लेकर कुछ कड़े दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। फिलहाल, पूरा देश अपने इस वीर सपूत की बहादुरी पर गर्व महसूस कर रहा है, जबकि राजनीतिक मंचों पर जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।








