नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत के पड़ोसी देशों में कूटनीतिक उथल-पुथल का दौर लगातार जारी है। ताजा मामले में बांग्लादेश ने भारत के एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को रद्द करने के बाद चीन का दामन थामा है। बांग्लादेश ने अपने रणनीतिक रूप से अहम मोंगला पोर्ट के विकास के लिए चीन से करीब 3200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज लिया है। इस घटनाक्रम को भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम ने इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए पाया है कि कैसे हिंद महासागर क्षेत्र में चीन अपना प्रभाव लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
दक्षिण एशिया के इस भू-राजनीतिक बदलाव के बीच, ड्रैगन यानी चीन वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां वह बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को बड़े कर्ज के जाल में फंसा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में धड़ल्ले से सोने की खरीदारी कर रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, चीन दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन गया है जिसके पास सबसे ज्यादा सोना मौजूद है। चीन के केंद्रीय बैंक ने इस साल रिकॉर्डतोड़ 103 टन से अधिक सोना खरीदा है, जिससे उसके पास कुल स्वर्ण भंडार बढ़कर 2410 टन तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन की बड़ी आर्थिक रणनीति को साफ तौर पर दर्शाता है।
मोंगला पोर्ट प्रोजेक्ट और चीन की बढ़ती घुसपैठ
बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट को लेकर ड्रैगन की एंट्री क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गई है। कुछ समय पहले इस बंदरगाह और आसपास के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भारत की मजबूत दावेदारी थी, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के चलते उसे दरकिनार कर दिया गया। अब 3200 करोड़ रुपये के इस नए चीनी कर्ज के बाद मोंगला पोर्ट पर चीन का दखल काफी हद तक बढ़ जाएगा। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से बंगाल की खाड़ी में चीन की नौसैनिक गतिविधियों को परोक्ष रूप से बढ़ावा मिल सकता है। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं ताकि देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के वर्चस्व को कमजोर करने के लिए भी चीन लगातार भारी मात्रा में सोने का भंडारण कर रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर में आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल के बीच सोने को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। चीन की यह सुनियोजित खरीदारी इस बात का संकेत है कि वह भविष्य के किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रहा है। इस भारी-भरकम गोल्ड रिजर्व के दम पर वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी मुद्रा युआन को मजबूत करने की लंबी चाल चल रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई देगा।
लद्दाख सीमा पर भारत का कड़ा रुख और मजबूत होती इंफ्रास्ट्रक्चर
एक तरफ जहां चीन कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर अपनी चालें चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय सेना भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। लद्दाख के दुर्गम इलाकों में भारत ने अपनी सामरिक ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है। हाल ही में बनकर तैयार हुई नीमो-पदम दारचा सड़क ने लद्दाख को जोड़ने वाले रास्तों को और अधिक सुरक्षित और सुगम बना दिया है। इस रणनीतिक सड़क मार्ग के चालू होने से भारतीय सेना के टैंक, हथियार और रसद सामग्री बेहद कम समय में सीधे सीमा तक पहुंचाई जा सकेगी। सर्दियों के मौसम में भी यह मार्ग खुला रहने से चीन और पाकिस्तान की हर नापाक हरकत पर पैनी नजर रखना अब और भी आसान हो गया है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि भारत और चीन के बीच चल रही इस शीत युद्ध जैसी कूटनीति का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदरगाहों, वित्तीय बाजारों और वैश्विक स्वर्ण भंडारों तक फैल चुका है। बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता आर्थिक निवेश भारत के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन भारतीय सेना की लगातार मजबूत होती सीमाई चौकसी और बुनियादी ढांचे का विकास इस चुनौती का माकूल जवाब दे रहा है। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारत इस कूटनीतिक घेराबंदी को मात देने के लिए क्या नई आर्थिक और सामरिक नीतियां अपनाता है।






