नई दिल्ली और अंतरराष्ट्रीय डेस्क — भारत के पड़ोसी देशों में ड्रैगन यानी चीन एक बार फिर अपनी चालें चलने लगा है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेश में भारत के एक पुराने प्रोजेक्ट को रद्द किए जाने के बाद, अब चीन ने वहां पैर पसार लिए हैं। बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट को विकसित करने के लिए चीन ने करीब 3200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज दिया है। इस भू-राजनीतिक हलचल से दक्षिण एशिया में भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिए नए खतरे पैदा हो रहे हैं, जिसपर नई दिल्ली की पैनी नजर बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर द फ्रीलान्स की टीम ने जब जमीनी और कूटनीतिक पहलुओं को खंगाला, तो यह बात सामने आई कि चीन हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाना चाहता है। मोंगला पोर्ट पर चीन की यह एंट्री भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंता का विषय है। बांग्लादेश की राजनीति में हालिया बदलावों के बाद चीन वहां आर्थिक मदद के नाम पर अपनी पकड़ मजबूत करने की फिराक में है, ताकि भारत को सामरिक रूप से घेरा जा सके।
लद्दाख में भारत ने बिछाया मजबूत सड़क नेटवर्क
एक तरफ जहां चीन बांग्लादेश के रास्ते भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय सेना ने सीमा पर अपनी ताकत कई गुना बढ़ा दी है। लद्दाख क्षेत्र में सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'नीमो-पदम दारचा सड़क' का निर्माण पूरा होने की कगार पर है। यह नया मार्ग लद्दाख को देश के बाकी हिस्सों से सुरक्षित और बारह महीने जोड़ने का काम करेगा। इस सड़क के बन जाने से सेना और भारी सैन्य साजो-सामान को सीमा तक पहुंचाने में बेहद आसानी होगी।
रक्षा जानकारों का मानना है कि यह सड़क चीन और पाकिस्तान दोनों को एक साथ कड़ा और स्पष्ट जवाब है। दुर्गम पहाड़ों और बेहद कठिन मौसम के बीच बनाई गई यह सड़क भारतीय इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है। सर्दियों के दिनों में जब जोजिला पास बंद हो जाता था, तब सेना को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब नीमो-पदम दारचा सड़क के जरिए बिना किसी रुकावट के सेना की आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे भारत की सामरिक स्थिति काफी मजबूत हुई है।
सोने के सबसे बड़े भंडारों पर चीन की नजर
केवल कूटनीति और जमीन पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजार में भी चीन आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन दुनिया में सबसे ज्यादा सोना रखने वाला पांचवां देश बन गया है। उसके पास अब कुल 2410 टन सोना जमा हो चुका है, जो भारत के कुल स्वर्ण भंडार से लगभग तीन गुना ज्यादा है। अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन लगातार भारी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन चीन ने अपनी खरीदारी रोकने के बजाय इस साल अकेले 103 टन से ज्यादा सोना खरीदकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ग्लोबल इकोनॉमी में अपनी करेंसी युआन को मजबूत करने और किसी भी संभावित अमेरिकी प्रतिबंध से बचने के लिए सोने का यह विशाल भंडार तैयार कर रहा है।
सीमा सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर कड़ी चुनौती
इन तमाम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू घटनाक्रमों से यह साफ हो जाता है कि भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक मुकाबला अब और तेज हो गया है। एक तरफ मोंगला पोर्ट के जरिए चीन समुद्री सीमाओं पर दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ भारत लद्दाख में बुनियादी ढांचे को मजबूत करके हर नापाक कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के समीकरण तेजी से बदलेंगे।





