नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह बदल गया है। लौटते हुए मॉनसून की विदाई का समय नजदीक था, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय प्रभाव ने इस प्रक्रिया को रोक दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस नए मौसमी बदलाव के कारण उत्तर भारत के कई बड़े राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक झमाझम बारिश होने की पूरी संभावना है। दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में आसमान में काले बादल छाए हुए हैं और कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश शुरू हो चुकी है।
इस चक्रवाती असर का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे मैदानी राज्यों पर देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को इस अचानक हुई बारिश से राहत जरूर मिली है, लेकिन किसानों की चिंताएं थोड़ी बढ़ गई हैं। धान की पकी हुई फसल के लिए यह बेमौसम बारिश नुकसानदेह साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें ताकि नमी से नुकसान न हो।
पहाड़ी राज्यों में आंधी-तूफान और बर्फबारी का अलर्ट
केवल मैदानी इलाके ही नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्यों में भी इस चक्रवात का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में आंधी-तूफान के साथ मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से पहाड़ी रास्तों की यात्रा करने से बचें, क्योंकि भारी बारिश के चलते भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का खतरा काफी बढ़ गया है।
प्रशासन ने भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। उत्तराखंड और हिमाचल के कई जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि अचानक आने वाली बाढ़ जैसी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पहाड़ी इलाकों में तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वहां ठंडक काफी बढ़ गई है और लोगों ने गर्म कपड़े निकालने शुरू कर दिए हैं।
राजधानी दिल्ली और एनसीआर में ट्रैफिक और तापमान का हाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद तथा फरीदाबाद में भी सुबह से ही मौसम सुहावना बना हुआ है। लगातार चल रही ठंडी हवाओं के कारण तापमान में चार से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, जलभराव और ट्रैफिक जाम आम लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। कई प्रमुख चौराहों और अंडरपास पर पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और पुलिस ट्रैफिक को नियंत्रित करने में जुटी है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बारिश अक्टूबर के महीने में एक असामान्य मौसमी घटना है, जो चक्रवातीय गतिविधियों के कारण संभव हुई है। आने वाले चौबीस घंटों में हवा की गति तेज हो सकती है और कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। दिल्ली के मौसम केंद्र ने लोगों से अपील की है कि घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर ले लें और सतर्क रहें ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
देश के अन्य राज्यों में मॉनसून का यूटर्न
उत्तर भारत के अलावा देश के करीब चौदह से अठारह राज्यों में इस समय मॉनसून का यह यूटर्न देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का नया दौर शुरू हुआ है, जिसके चलते वहां भी विशेष प्रशासनिक चौकसी बरती जा रही है। कुल मिलाकर, मॉनसून की वापसी का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ और दिन बादलों और बारिश के बीच ही गुजारने होंगे। मौसम विभाग लगातार उपग्रहों के जरिए इस चक्रवात की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।







