नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सोशल मीडिया इन दिनों एक नए और डरावने दावे से पटा हुआ है। इंटरनेट पर यह बात तेजी से फैलाई जा रही है कि रूस से कोई ऐसी बीमारी निकली है जो कोरोना वायरस से एक हजार गुना ज्यादा खतरनाक है। इस खबर के सामने आते ही आम लोगों के बीच चिंता और डर का माहौल बनने लगा है। द फ्रीलान्स की टीम ने इस वायरल दावे की गहराई से पड़ताल की है ताकि पाठकों तक असली सच पहुंचाया जा सके।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि इस तरह की खबरें किसी स्थापित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल या विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में नहीं हैं। कुछ अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और सनसनीखेज वेबसाइट्स ने इस खबर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। रूस से ऐसी किसी नई और भयानक महामारी के फैलने की कोई आधिकारिक पुष्टि वहां की सरकार या स्वास्थ्य मंत्रालय ने नहीं की है। इसके बावजूद लोग इस मैसेज को बिना सोचे-समझे एक-दूसरे को भेज रहे हैं।
इंटरनेट पर वायरल खबरों का सच
जब हमने इस तरह के संदेशों के स्रोत की तलाश की तो कोई पुख्ता मेडिकल दस्तावेज हाथ नहीं लगा। महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी कोई पुराना वीडियो या फर्जी खबर सामने आती है, तो उसे नए सिरे से पेश कर दिया जाता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है जहां पुराने बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस तरह की किसी भी महामारी के देश में आने या फैलने की बात से साफ इनकार किया है।
दूसरी ओर, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य घटनाएं भी समानांतर रूप से चर्चा में बनी हुई हैं। बंगाल में सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत से एक परिवार में मातम छा गया है। मुक्तेश्वर इलाके में स्थानीय अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से फिलहाल रोक दिया है जिसके पीछे स्थानीय कारण और मौसम से जुड़ी दिक्कतें हैं। इन तमाम अलग-अलग खबरों को जब एक साथ जोड़कर देखा जाता है, तो जनता के मन में और ज्यादा भ्रम पैदा हो जाता है।
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राजनीतिक बयानबाजी और अन्य घटनाएं
एक तरफ जहां स्वास्थ्य से जुड़ी अफवाहें फैल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में भी बयानों का दौर जारी है। हाल ही में एक बयान में नेता अनुराग ठाकुर ने कहा कि झूठ की गूंज फैलाने वालों को जोरदार झटका लगा है। इसके अलावा त्योहारी सीजन को देखते हुए रेलवे ने भी खास तैयारियां शुरू कर दी हैं जिसके तहत आठ अक्टूबर को भुवनेश्वर जयनगर पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी ताकि यात्रियों को आवाजाही में कोई परेशानी न हो।
आम जनता के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे किसी भी वायरल संदेश पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। जब तक सरकार या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक चेतावनी जारी न हो, तब तक डरने की कोई जरूरत नहीं है। द फ्रीलान्स की सलाह है कि इस तरह की डरावनी खबरों को आगे बढ़ाने से बचें। अफवाह फैलाने वालों की बजाय केवल प्रामाणिक और सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा रखें।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी अब तक की पड़ताल यही कहती है कि रूस से किसी भयानक बीमारी के फैलने की खबर पूरी तरह आधारहीन है। कोरोना जैसी महामारी का सामना कर चुके हमारे समाज में इस तरह की अफवाहें बहुत जल्दी डर पैदा कर देती हैं। स्थानीय प्रशासन और साइबर सेल ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं जो फर्जी खबरें फैलाकर समाज में डर का माहौल बनाते हैं। पाठकों से अपील है कि वे सतर्क रहें और केवल सच को ही आगे बढ़ाएं।




